संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। कोई भी व्यक्ति नेत्रदान कर दूसरे की जिंदगी को रोशन कर सकता है। इसीलिए नेत्रदान को महादान की संज्ञान दी गई है। जिले के 150 लोगों ने नेत्रदान के लिए फार्म भरा है।
हर वर्ष 10 जून को विश्व नेत्रदान दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करना है। 15 से 75 वर्ष की उम्र तक कोई भी व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है। यदि किसी को चश्मा लगा हो या मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ हो, वह भी नेत्रदान कर सकता है।
नेत्रदान के लिए मृत्यु के बाद किसी तरह का ऑपरेशन नहीं होता। महज 15 मिनट की प्रक्रिया में आंखों के कार्निया को निकाला जाता है। नागरिक अस्पताल में वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कंचन यादव ने बताया कि नागरिक अस्पताल के साथ ही सीएचसी-पीएचसी की ओपीडी में आने वाले लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया जाता है। गांवों में नेत्र जांच कैंप लगाए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि आंखें दान करने के लिए फॉर्म भरना पड़ता है। जिले में आई कलेक्शन सेंटर है। यहां से आंखें कलेक्ट कर रोहतक पीजीआई भेजी जाती हैं। नेत्रदानी के मरणोपरांत 6 से 8 घंटे के अंदर नेत्र एकत्र करना जरूरी होता है। इसके बाद किसी दूसरे को कॉर्निया ट्रांसप्लांट नहीं किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से नेत्रदान के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिले में 150 लोगों ने नेत्रदान करने के लिए सिविल अस्पताल में फॉर्म भरा है।