धारूहेड़ा। दोपहिया वाहनों के उत्पादन में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाला धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र वर्तमान में बीमार की स्थिति में है। यहां के लोगों का सबसे बड़ा मर्ज राजस्थान के भिवाड़ी से उद्योगों का आने वाला रसायनयुक्त पानी है। आसपास के गांवों के उपजाऊ खेतों की हरियाली गायब हो चुकी है। यहां की धरती बंजर हो रही है। लोग बीमार हो रहे हैं, लेकिन इस मर्ज की दवा नहीं हो पा रही है। समस्या का हल न होने के पीछे शासन तंत्र की कमजोरी बड़ा कारण है। हालांकि रेवाड़ी जिला प्रशासन की ओर से भिवाड़ी प्रशासन के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं, लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।
भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से रसायनयुक्त पानी वर्षों से आ रहा है। बीच-बीच में अंकुश के प्रयास हुए हैं, लेकिन बारिश होने के साथ ही राजस्थान से हजारों गैलन पानी छोड़ दिया जाता है। यहां तक की फ्लाइओवर बनने से पहले तक तो यही पानी नेशनल हाईवे नंबर आठ की रफ्तार रोकता रहा है। अब भी इसकी सर्विस लेन सुरक्षित नहीं है। बारिश के समय यहां से वाहनों को रेंगकर निकलना पड़ा था।
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला दूषित पानी धारूहेड़ा की आबादी व आसपास स्थित गांवों के निकट एकत्रित हो रहा है। दूषित पानी के कारण बीमारियां भी पनप रही हैं। खुजली, दाद व अन्य त्वचा संबंधी बीमारियों के शिकार भी लोग हो रहे हैं। कई जगह पर गांवों में जमीन का पानी भी बदल चुका है तथा न पीने योग्य बचा है और न ही अन्य कार्य में प्रयोग करने योग्य। पानी से बदबू भी आती है।
इन गांवों के किसान नहीं कर पा रहे खेती
क्षेत्र के खेतों में रसायनयुक्त पानी एकत्रित होने के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं। कई जगह पर स्थिति यह भी हो चुकी है कि फसल पैदा होनी ही बंद हो चुकी है। जमीन बंजर हो चुकी है। गांव धारूहेड़ा,राजपुरा, भटसाना, नंदरामपुर बास, आकेड़ा, अलावलपुर, महेश्वरी, खरखड़ा व खलियावास सहित अन्य गांवों के किसान दूषित पानी के कारण खेती नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण कई बार विरोध भी जता चुके हैं, लेकिन अभी तक पानी का स्थायी समाधान प्रशासन नहीं ढूंढ पाया है।