ट्रॉमा सेंटर में घंटों फर्श पर पड़ा रहा बेसुध मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
जिले के एकमात्र ट्रॉमा सेंटर में बदइंतजामी हावी है। हालत यह है कि ट्रॉमा सेंटर में मरीज घंटों तक जमीन पर लेटा रहता है, लेकिन उसकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। ऐसा ही मामला शनिवार रात भी देखा गया जब ट्रॉमा के आपातकालीन कक्ष में एक बेसुध मरीज घंटों नीचे पड़ा रहा, लेकिन उसकी किसी ने कोई सुध नहीं ली। यह स्थिति तब और भी खतरनाक हो जाती है। जब यह ट्रॉमा सेंटर खुद ही किराए के डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग एवं जिले में होने वाली दुर्घटनाओं में घायल लोगों को त्वरित उपचार के लिए शहर में बना ट्रॉमा सेंटर शुरुआत से ही उधार के डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टर ट्रॉमा में ड्यूटी पर लगाए जाते हैं। आलम यह है कि डॉक्टरों की 17 प्रस्तावित पोस्ट पर सालों बीत जाने बावजूद एक भी नियुक्ति नहीं हो पाई है। डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते ट्रॉमा महज रैफरल प्वाइंट बनकर रह गया है। यहां आने वाले अधिकतर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद रोहतक रेफर कर दिया जाता है। शनिवार रात की घटना को देख जब अमर उजाला ने अस्पताल प्रशासन से जवाब तलब किया तो आनन फानन में मरीज को स्ट्रेचर पर लेटाया गया।
हर साल होती है 13 लाख लोगों की मौत
एक आंकडे़ के अनुसार देश में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में करीब 13 लाख लोगों की मौत हो जाती है। अधिकतर मौत राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाओं के चलते होती हैं। बड़ी बात यह है कि मरने वालों की औसत आयु 15-29 वर्ष के बीच होती है। राजधानी को मुंबई एवं चेन्नई से जोडने वाले एवं देश के व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों में से एक एनएच-8 रेवाड़ी से होता हुआ गुजरता है। आए दिन यहां पर दर्जनों दुर्घटनाएं होती हैं। जिनके लिए रेवाड़ी ट्रॉमा सेंटर ही एक मात्र सहारा है। लेकिन यहां पर डॉक्टरों की कमी एवं पैरामेडिकल स्टाफ की संवेदनहीनता के चलते हालात बद्तर नजर आते हैं। डॉक्टरों के अनुसार दुर्घटना के पहले पहले पांच मिनट में यदि उपचार मिल जाए तो काफी हद तक मौत के आंकड़ों को कम किया जा सकता है।
2012 में ट्रॉमा के साथ स्टाफ तैनाती की हुई थी घोषणा
वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिल्ली में ट्रॉमा पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रेवाड़ी के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ने वाले अन्य जिलों में सात ट्रॉमा सेंटर खोलने की घोषणा की थी। लेकिन रेवाड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रॉमा तो बनना दूर आज तक यहां पर एक ईंट भी नहीं लग पाई है। दूसरी ओर रेवाड़ी स्थित ट्रॉमा सेंटर में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की बात कहीं गई थी। लेकिन बातें महज हवा बनकर रह गई हैं।
डॉक्टरों की 17 प्रस्तावित पोस्ट के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार लेटर लिखा जा चुका है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टर ट्रॉमा में ड्यूटी पर लगाए जाते हैं। शनिवार की घटना की जांच की जाएगी, जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई की जाएगी। हमारी ओर से घायलों एवं अन्य मरीजों बेहतर उपचार देने की कोशिश की जाती है। उन्हीं मरीजों को रेफर किया जाता है जिनका उपचार यहां पर संभव नहीं हो पाता है। -डॉ. सुदर्शन पंवार, कार्यकारी सिविल सर्जन रेवाड़ी