तीन साल में काट दिए दस हजार पेड़
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
विकास के नाम पर जिले में तीन साल के दौरान दस हजार पेड़ों की ‘बलि’ दी गई है। इतने बड़े तादात में हरे वृक्षों को काटने की जो भरपाई की गई है वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। विभाग भी मानता है कि एक पौधे को वृक्ष बनने में करीब 20 साल लग जाते हैं। इस प्रकार समाज और अन्य को इसका क्या नुकसान हो सकता है, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह भी उस स्थिति में जब प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए 33 फीसदी जमीन पर पेड़ होने चाहिए जबकि जिले में केवल 3.08 फीसदी क्षेत्र में ही पेड़ हैं।
पिछले सालों में रेवाड़ी-महेंद्रगढ़, रेवाड़ी-धारूहेड़ा, रेवाड़ी-बेरली, रेवाड़ी-नारनौल सहित कई रोड बने हैं। इनमें रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ रोड पर करीब दो हजार तो रेवाड़ी-धारूहेड़ा रोड के समय करीब 1200 पेड़ काटे गए। हालांकि वन विभाग हर वर्ष पौधरोपण कर इस कमी को पूरी करने का दावा करता है, लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले कई सालों में पूरे प्रदेश में वन क्षेत्र ना के बराबर ही बड़ा है। यही हालत रेवाड़ी की है। वन विभाग ने इस वर्ष रेवाड़ी में साढ़े चार लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। ये पौधे पंचायती जमीन, सरकारी वन भूमि, रेल, रोड एवं कैनाल के समीप, सेक्टर- 38 और सेक्टर चार-पांच के रिजर्व क्षेत्र में पौधे लगाए जाने हैं। गत वर्ष भी इतने ही पौधे जिले में लगाए थे। वन विभाग का यह भी मानना है कि इनमें से करीब तीस फीसदी पौधे विभिन्न कारणों से खराब हो जाते हैं।
नहीं चढ़ सकी योजना सिरे
सरकार ने पेड़ों को लेकर कई तरह की योजनाएं शुरू की। इनमें एक योजना ग्रीन हाईवे पॉलिसी रही। इसमें हाईवे बनाते समय जब पेड़ काटे जाते हैं तो उस बेल्ट को छोड़कर समीप ग्रीन बेल्ट विकसित की जाती है। कई जगह समीप में ऐसी कोई जगह नहीं होने के कारण यह मामला कोर्ट में चला जाता है। वहीं एक अन्य स्कीम के तहत वन विभाग की जमीन पर जहां पेड़ समाप्त हो रहे हैं। वहां पेड़ लगाए जाते हैं। इसके तहत सड़क बनाने वाली एजेंसी जितनी जमीन डायवर्ट करती है। उसके बदले दोगुनी जमीन वन विभाग को पौधे लगाने के लिए देनी पड़ती है। वन विभाग ने एक योजना भी शुरू की। इसमें खेतों में दो से तीन लाइनों में पेड़ लगाकर वन विभाग एक साल तक उनकी परवरिश भी करता है। अधिक मुनाफा नहीं दिखने के कारण किसानों ने इस योजना में अधिक रुचि नहीं दिखाई।
वन महोत्सव में लगे थे 1200 पौधे
गत वर्ष राज्य सरकार ने 15 जुलाई को रेवाड़ी के बूढपन गांव में वन महोत्सव मनाया था। इसमें कई तरह के करीब 1200 पौधे लगाए गए। इनमें रोड के दोनों और एवं स्कूल सहित कई जगह शामिल की गई है। वन विभाग ने इनकी पूरी साज की। यही कारण है कि इनमें से अधिकांश पौधे ठीक-ठाक हैं। वहीं गत वर्ष भी वन विभाग ने जिलेभर में साढ़े चार लाख पौधे लगाए थे।
बेहद चिंतनीय है स्थिति
भूगोल विषय के सहायक प्रोफेसर कंवर सिंह यादव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2013 में कोलकाता में इंटरनेशनल सेशन ऑफ साइंस कांग्रेस का सेशन अटेंड किया। इसमें उन्होंने वर्ष 1950 से 1912 तक का सर्वे प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया है कि 1997 के बाद 15 साल बेहद गर्म थे। पिछले 16 साल में से 15 साल बेहद गर्म हैं। वन विभाग एक प्रतिशत भी वन क्षेत्र बढ़ा नहीं सका। ट्री कवर एरिया भी मैच्योर होकर टूट गए। इससे क्षेत्र में गर्म रहा है। मौसम वेधशालाएं भी सही जानकारी नहीं दे पा रही हैं। ये तापमान कम शो रही थी। इनकी लोकेशन करीब 40 साल पहले स्टेबलिश हुई थी। अब वहां बिल्डिंग बन गई है। पेड़ों की छांव में आ गई। हमारी वेधशालाएं केवल इसरो के आधार पर ही चल रही हैं।
यहां हो रहे बेहतर प्रयास
एक और जहां पेड़ कम होने पर सभी चिंतित हैं। वहीं दूसरी और आईजीयू में लगा आयुर्वेदिक प्लांट सभी आसपास के क्षेत्र में अनुपम उदाहरण है। वन विभाग के सहयोग से विकसित किए चार एकड़ के प्लांट में सभी जड़ी-बूटियों, जिनमें पत्थरचट्टा, अमरीकन तुलसी, काला धतूरा, जंगली प्याज, लेमनग्रास, सुदर्शन आदि उगाई गई हैं।
सभी को जागरूक होना होगा
जिले में पिछले तीन सालों में करीब 10 हजार पेड़ काटे हैं। वन विभाग अपने स्तर पर इनकी भरपाई करने की कोशिश करता है। इस बार भी जिले में साढ़े चार लाख पौधे लगाए जाएंगे। हालांकि पौधे को पेड़ बनने में काफी समय लगता है। - रामप्रताप यादव, आरएफओ, रेवाड़ी