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-जिले के थानों एवं चौकियों के भवन है बदहाल

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लोगों को सुरक्षा देने वाली पुलिस खुद असुरक्षित
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। जिले की करीब 10 लाख की आबादी की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही जिले की पुलिस खुद ही असुरक्षित है। जिले में बने अधिकतर थाने और चौकियां खस्ताहाल भवनों में चल रही हैं। वहीं कई जगह तो बिल्कुल खंडहर हो चुकी हैं, जिनमें घुसने से भी डर लगता है। ऐसे में पुलिस जान हथेली पर लेकर इनमें काम करने को मजबूर है। जिले में 14 थाने और करीब 15 पुलिस चौकी संचालित है। जिनमें नियुक्त पुलिसकर्मी जिलेवासियों की सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं। मगर कई थानों और चौकियों की दीवारों एवं छतों से प्लास्टर तक गिरने लगा है, जिससे पुलिसकर्मी हर वक्त समय डर के साये में रहते हैं। रविवार को अमर उजाला की टीम ने जिले के विभिन्न पुलिस थानों का हाल जाना।
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ये पुलिस चौकी है जर्जर भवनों में
जिले के डहीना, नाहड़, गढी बोलनी चौकी, कुंड व सेक्टर तीन पुलिस चौकी के भवन जर्जर हालत में हैं। इनमें अधिकांश में कहीं छत से प्लास्टर गिर रहा है तो कहीं दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। कई चौकियों में मवेशी भी घूमते हैं। कोसली थाने के अंतर्गत आने वाली नाहड़ पुलिस चौकी वर्षों से टूट हुए भवन में चल रही है और यह कभी गिर सकती है। वहीं हाईवे स्थित गढी बोलनी पुलिस चौकी एक टीन शैड में चलाई जा रही है, जहां से हाईवे पर होने वाली घटनाओं पर रोकथाम लगाने का प्रयास किया जाता है। वहीं चौकी की हालत देख कर उसकी बदहाली का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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किराए के भवनों में चल रहे थाने
जिले के रामपुरा और रोहड़ाई पुलिस थाने तो किराए के भवनों में चल रहे हैं। रामपुरा थाना नारनौल रोड और रोहड़ाई थाना एनएच-71 पर स्थित है, जहां प्रतिदिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। थानों में जगह नहीं होने के कारण इन थानों की पुलिस की ओर से पकड़े गए अवैध वाहन सड़कों पर ही खड़े रहते हैं।
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जिले की क्षतिग्रस्त चौकियों और थानों की जानकारी है। समय-समय पर उच्चाधिकारियों को इसके लिए प्रपोजल बनाकर भेजा जाता है। मरम्मत भी कराई जाती है। इसके बाद भी कोई समस्या है तो उसका समाधान कराया जाएगा।
संगीता कालिया, एसपी रेवाड़ी
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