निजी अस्पतालों में ओपीडी रही बंद, नागरिक अस्पताल में पहुंचे 1300 मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
नेशनल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर मेडिकल काउंसिल बिल के विरोध में मंगलवार को जिले के सभी निजी अस्पतालों में सुबह छह से दोपहर तीन बजे तक ओपीडी बंद रही। हालांकि बिल का मसौदा संसद की स्टैंडिंग कमेटी को सौंपने की सूचना पर तीन बजे जिले के सभी अस्पताल खुल गए। आईएमए के आह्वान के बाद मंगलवार सुबह से ही निजी अस्पताल बंद रहे। इस बारे में पहले ही अवगत करा दिया था, लेकिन फिर भी निजी अस्पताल में पहुंचे मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। अस्पतालों में केवल इमरजेंसी सेवाएं ही देखी गई।
वहीं नागरिक अस्पताल में सोमवार की तुलना में मंगलवार को अधिक भीड़ रही। अस्पताल प्रबंधन ने भी इसके लिए पहले से सारे इंतजाम किए थे। नागरिक अस्पताल में पहले से सभी चिकित्सकों को इसके लिए सतर्क कर दिया था। ओपीडी की पर्ची कटवाने के लिए अस्पताल में लंबी कतारें देखी गई। मंगलवार को नागरिक अस्पताल में 1300 मरीज में ओपीडी में आए। वहीं सोमवार को सिविल अस्पताल में ओपीडी में 900 मरीज आए। इससे पूर्व आईएम के पदाधिकारियों ने मांगों को लेकर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के नाम भी ज्ञापन दिया।
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पिछले एक सप्ताह में ओपीडी
02 जनवरी 1300
01 जनवरी 900
30 दिसंबर 1075
29 दिसंबर 1275
28 दिसंबर 1449
27 दिसंबर 1645
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यह हैं आईएमए की मांग
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन केंद्र सरकार की ओर से मेडिकल काउंसिल बिल का विरोध कर रही है। उनके अनुसार यह बिल प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की जुबान बोलेगा। जिससे भ्रष्टाचार का नया रास्ता खुलेगा। नए मेडिकल कॉलेज की अनुमति लेने की प्रक्रिया में कोई कठोर नियम नहीं होंगे। अपने हिसाब से सीटों की संख्या बढ़ा सकेंगे। 40 प्रतिशत सीटों पर फीस सरकार तय करेगी। 60 प्रतिशत की फीस मैनेजमेंट तय करेगी। चिकित्सा शिक्षा महंगी होगी तो सेवाएं भी महंगी होगी। मेडिकल कॉलेज से यदि गलती हो जाए तो पांच करोड़ रुपये जुर्माना देकर छूट मिल जाएगी। कमीशन में भारत के केवल पांच राज्यों के प्रतिनिधि होंगे। 24 राज्यों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होगा। गैर वैज्ञानिक प्रद्घति आयुष, जिसे भारतीय पद्धति बोलकर पद्धतियों का घालमेल किया जा रहा है। इसके लिए अलग से ब्रिज कोर्स चलाए जाएंगे। एमबीबीएस पढ़ा छात्र कोई भी बिना पंजीयन, बिना भारत की कोई परीक्षा पास किए भारत में प्रैक्टिस कर सकेगा।
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अस्पताल में पूरे प्रबंध किए गए हैं। हड़ताल को देखते हुए मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी गई।
डॉ. कृष्ण कुमार, सीएमओ, रेवाड़ी
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सरकार की ओर से यह बिल दोपहर दो बजे राज्यसभा में पेश करना था। लेकिन इसे संसदीय स्टैंडिंग कमेटी फॉर हेल्थ के अध्यक्ष रामगोपाल यादव को भेज दिया है। इससे बिल में कुछ संशोधन की आस जगी है। इसके बाद हमने हड़ताल समाप्त कर दी।
डॉ. करतार सिंह, अध्यक्ष, आईएमए, रेवाड़ी