बिना अभ्यास के कोई धुरंधर हो नहीं सकता...
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
न खुद को जीत पाए जो, सिकंदर हो नहीं सकता। बिना अभ्यास के कोई धुरंधर हो नहीं सकता।
डॉ. मधु चतुर्वेदी ने जब यह कविता प्रस्तुत की तो सारा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अवसर था बाल भवन में सांस्कृतिक संस्था मित्रम की ओर से ‘एक प्याली चाय... कवियों के साथ’ शीर्षक से गोष्ठी का। यहां कवियों ने अपनी कविताओं से खूब रंग जमाया। इसका आयोजन हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला के सहयोग से किया गया। प्रो. रमेश चंद शर्मा ने, जरा सी बाढ़ आते ही लगे जो तोड़ने सीमा, वो कोई ताल है उथला, समंदर हो नहीं सकता। गजलकार विपिन सुनेजा ने, वार करती है सदा पीछे से आकर, मौत से आंखें मिलाना चाहता हूं। पूनम जोशी ने, हममें तुममें सदा भाईचारा रहे, धड़कनें हम बनें दिल तुम्हारा रहे। प्रो. रमेश सिद्धार्थ ने, हर दिल में गुंजाती है मुहब्बत के तराने, युग-युग से गूंजे हैं, वही तान सिर आंखे जैसी कविताएं प्रस्तुत की।
मित्रम के संयोजक ऋषि सिंहल ने डॉ. मधु चतुर्वेेदी को स्मृति चिह्न भेंट करके सम्मानित किया। कार्यक्रम में डॉ. एसएन सक्सेना, डॉ. सतीश सक्सेना, डॉ. उमाशंकर यादव, राजेंद्र यादव, मनोहरलाल, ओमप्रकाश राजपाल, मोहनलाल बंसल, महेंद्र मधुर, नरेंद्र जोशी, गोपाल वरिष्ठ, ब्रजेश कुमारी, पूनम वधवा, अनिल मोरवाल, श्रीपति शेखावत, खूबराम सैनी, सत्यप्रकाश, डॉ. शुचि गुप्ता, संजीता यादव, सविता मदान, पूनम शर्मा, चंद्रकांता आदि मौजूद थे।