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कॉलेज टाइम पर बसें नहीं चलीं तो होगा आंदोलन

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कॉलेज टाइम पर बसें नहीं चलीं तो होगा आंदोलन
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अमर उजाला ब्यूरो
कोसली।
कोसली-कनीना मार्ग पर यातायात के साधनों की कमी से बेटियों की पढ़ाई प्रभावित होने के कारण क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है। रविवार को विभिन्न संगठनों के लोगों ने बैठक कर इस समस्या पर चर्चा की। ग्रामीणों का कहना था कि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। नाराज ग्रामीणों का कहना था कि एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा दे रही है, वहीं क्षेत्र की करीब 200 छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। इस बारे में पिछले वर्ष आंदोलन करने के बाद भी अधिकारियों को चेताया गया था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना था कि बेटियों को परेशान नहीं होने देंगे। अब जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि इस मार्ग पर यातायात के साधनों की व्यवस्था नहीं होने से बेटियों को अन्य वाहनों में लटककर शिक्षण संस्थानों तक जाना पड़ता है।
कोसली क्षेत्र के गांव नाहड़ में राजकीय महाविद्यालय 40 साल पुराना है। यहां यातायात के साधनों के अभाव में भी ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं मजबूरी में दाखिला लेती हैं। हालांकि कोसली कनीना रूट पर कालेज समय पर बसें चलाने के लिए छात्राओं के अलावा ग्रामीणों ने बसें चलाने का आग्रह किया लेकिन ना तो बसें चली ओर ना ही यातायात के साधनों में कोई बढ़ोत्तरी हुई। अब मजबूरी में छात्राएं निजी बसों और वाहनों में लटक कर सफर करती हैं।
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हमारे गांव में सालों से बसों का अभाव चल रहा है। समय-समय पर पुलिस निजी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने एवं चालान करे से बड़ी परेशानी होती है। शीघ्र ही अगर बसों की व्यवस्था नहीं की गई तो रास्ता जाम कर देंगे। - सुखविंद्र, रामगढ़
बसों का अभाव तो आजादी के बाद से ही कोसली- कनीना मार्ग पर चला आ रहा है। कोसली कनीना मार्ग पर निजी बसों व सहकारी समिति कि बसों के सहारे लोग अपने गंतव्य तक पहुंच रहे थे लेकिन कुछ सालों से वो भी बंद हो चुकी है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव कॉलेज जाने वाले बच्चों खास कर छात्राओं पर पड़ रहा है। - जयवीर ग्रामीण
कोसली-कनीना मार्ग पर जहां नाहड़ कॉलेज में सैकड़ों छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। वहीं कनीना स्थित कालेजों में भी सैकड़ों की संख्या में छात्राएं जैसे तैसे शिक्षा ग्रहण करने पहुंच रहीं हैं। शीघ्र ही बसों की व्यवस्था नही कि गई तो धरना प्रदर्शन करने का बाध्य होंगे। - हरीश कुमार, ग्रामीण
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यातायात के साधनों की बड़ी दिक्कत है। कई बार शिकायत देने के बाद भी कोई हल नहीं निकल रहा है। हम इस समस्या का हर हाल में समाधान चाहते हैं। नहीं तो हम आंदोलन करेंगे। - बबलू राव, ग्रामीण
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