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बिना नियम चल रहे 1000 पीजी, रहने वालों का पुलिस से सत्यापन तक नहीं

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रेवाड़ी। रेवाड़ी शहर, बावल व धारूहेड़ा में करीब एक हजार पेइंग गेस्ट (पीजी) संचालित हो रहे हैं। दो बड़े औद्योगिक हब होने के कारण यहां 25 हजार से अधिक लोग कंपनियों में कार्य करते हैं। पीजी ही कर्मचारियों और अधिकतर छात्रों का ठिकाना बन रहा है। पिछले पांच साल से बिना नियम के चल रहे पीजी की भरमार हो गई है। इनमें से पुलिस के पास किसी का न तो पंजीकरण है और न ही यहां पर रहने वालों के लिए कोई नियम बनाया गया है। पीजी संचालक पुलिस से इनका सत्यापन तक नहीं कराते हैं। इससे अपराध बढ़ रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण दो दिन पहले वाल्मीकि मोहल्ले के पीजी में हुई एक युवक की हत्या है।
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एक आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल दो से तीन हजार से अधिक लोग में यहां नौकरी करने के लिए आते हैं। वे इन्हीं पीजी में शरण लेते हैं। इसके बावजूद यहां न पीजी संचालक और न ही पुलिस के पास उनका रिकॉर्ड तक तक मौजूद है। अनुमान के मुताबिक रेवाड़ी में 500, बावल में 200 व धारूहेड़ा क्षेत्र में 300 से अधिक पीजी संचालित किए जा रहे हैं।
कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए घराें में बिना बोर्ड के चल रहा पीजी
शहर में पीजी की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए लोग बिना बोर्ड लगाए ही घरों में पेइंग गेस्ट के रूप में रखे रहे हैं। इन पीजी से मोहल्लों में वहां रहने वाले लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। यहां तक की लोगों ने पुलिस तक को शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई तक नहीं हो रही है। पीजी में रहने वाले दिन-रात तेज आवाज में म्युजिक बजाना और हंगामा करना आम बात हो गई है। वहीं शहर में कॉलेज व कोचिंग सेंटरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही हैं, जिससे कारण विद्यार्थियों को भी पीजी का सहारा लेना पड़ रहा है।
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शिक्षण संस्थानों के 50 फीसदी छात्र पीजी में रहने को मजबूर
शिक्षा का हब बनने के बाद रेवाड़ी शहर के मॉडल टाउन, ब्रास मार्केट, दिल्ली रोड, बावल रोड व महाराणा प्रताप चौक सहित अनेक स्थानों पर शिक्षण संस्थान खुले हुए हैं। इन शिक्षण संस्थान में एक आंकड़ा देखे तो 3 से 5 हजार से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ते हैं। 11वीं, 12वीं के अलावा स्पेशल कोर्स की कक्षाएं लेने के लिए अलवर, झज्जर, भिवानी सहित आस पास के जिलों से छात्र यहां आते हैं। राजस्थान की सीमा साथ लगने के कारण वहां से विद्यार्थी भी पढ़ने आते हैं। इनमें से 50 फीसदी छात्र पीजी में ही रहते हैं।
कहां-कहां पीजी
शहर में अधिकतर पीजी की संख्या शिक्षण संस्थानों के पास में ही है। इसमें मुख्य रूप से मॉडल टाउन, विजय नगर रोड, सेक्टर पांच, बावल रोड, नारनौल रोड व दिल्ली रोड पर ज्यादा पीजी खुले हुए हैं। इसके अलावा बावल के मोहल्ला हसनपुरा, किला के पीछे, रेवाड़ी रोड, वाल्मीकि मोहल्ला, नैचाना रोड़ व धारूहेड़ा नंदरामपुर बास रोड, भिवाड़ी रोड, भगतराम कॉलोनी सहित अन्य मोहल्लों में पीजी की संख्या अधिक है। घरों में बने इन पीजी में अलग व्यवस्था होती है।
एक कमरे में रहते हैं 2 से 4 लोग
पीजी संचालक रुपयों की लालच में एक कमरे में 2 से 4 लोगों को रखता है। यहां कोई नियम नहीं है। वहीं संचालक यहां रहने वालों से सुविधा के नाम पर ज्यादा रुपये ऐंठते हैं। पीजी में सीसीटीवी कैमरों के अलावा सुरक्षा गार्ड तक नहीं रखे जाते हैं। लड़कियों के पीजी की सुरक्षा खुद मकान मालिक ही करता है। शहर में ज्यादा पीजी घरों में ही बने हुए हैं। घर के मालिक की तरफ से अपने घर के कमरों को पीजी की तरह प्रयोग कर पैसा वसूला जा रहा है। अलग से पूरी बिल्डिंग को पीजी की तरफ प्रयोग में लाना बहुत कम जगह प्रयोग हो रहा है। यहां रहने वालों से पीजी मालिक 4 से 6 हजार रुपये तक वसूलते हैं।
एक नजर इस पर भी
नौकरीपेशा व विद्यार्थी : करीब 25 हजार
- शिक्षण संस्थान : करीब 100
- किराया : 4 से 6 हजार रुपये
चार दिन पूर्व हुई थी हत्या
करीब चार दिन पूर्व बावल कस्बा के वाल्मीकि मोहल्ले में संचालित एक पीजी में दो युवक व एक युवती रह रहे थे। इनमें किसी बात को लेकर दोनों युवकों में विवाद हो गया था, जिसमें एक युवक ने दूसरे को चाकू से गोद कर मार डाला था। पुलिस जांच में सामने आया था कि इनमें किसी का भी पुलिस से सत्यापन नहीं कराया गया था।
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