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Rewari News: चार दिन में 100 शिकायतें आईं, मात्र 16 निपटाईं

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रेवाड़ी। शुक्रवार को समाधान शिविर में शिकायतें सुनते हुए। स्रोत : डीपीआरओ
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रेवाड़ी। समाधान शिविर तो रोजाना लग रहे हैं, मगर समाधान केवल नाम मात्र लोगों के ही हो रहे हैं। मंगलवार से लेकर शुक्रवार तक चार दिनों में करीब 100 शिकायतें शिविर में आ चुकी हैं। समाधान केवल 16 लोगों का ही हुआ है। मंगलवार को 42 शिकायतें आई थीं, जिसमें से एक का भी समाधान नहीं हो पाया था।
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हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि उस दिन कुछ मामलों के समाधान हुए थे, मगर इसका आंकड़ा जारी नहीं किया गया था। कुल कितनी शिकायतें आई, इसी की जानकारी दी गई थी। बुधवार को 19 शिकायतें आई थीं, जिसमें से पांच मामलों का समाधान हुआ था। वीरवार को 16 शिकायतें मिली, इनमें से केवल तीन का ही समाधान मौके पर हो पाया था। शुक्रवार को 23 शिकायतों में से आठ का समाधान हो पाया है।
कुल मिलाकर शिविर में जाकर भी लोगों का समाधान नहीं हो पा रहा है। लोग अभी भी दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जबकि यह शिविर लोगों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए लगाया जाता है, उसके बावजूद कुल रिकवरी मात्र 16 प्रतिशत है। समाधान शिविर में अपनी प्रापर्टी आईडी, हाउस टैक्स, जन्म प्रमाण पत्र, पानी निकासी, विकास शुल्क, एनओसी आदि समस्याएं आ रही हैं।
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2 दिन तक रहे उच्च अधिकारी, अब नप अधिकारी सुन रहे शिकायत

मंगलवार को नगर परिषद सभागार में पहला शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में एडीसी अनुपमा अंजलि, नगर परिषद की चेयरपर्सन पूनम यादव ने लोगों की शिकायतें सुनी थी। शिविर में जिस तरह से अधिकारियों को फटकार लगाई जा रही थी, लोगों को भी उम्मीद जगी कि आने वाले दिनों में अब कुछ अच्छा होगा। मगर इसका कोई फायदा नहीं मिला। कारण यह रहा कि दो दिन तक एडीसी और चेयरपर्सन शिविर में तो आईं, उसके बाद दोनों की गैर मौजूदगी रही। शिकायतें नगर परिषद के अधिकारियों ने सुनीं। शिविर में कोई भी बड़ा अधिकारी न होने पर अन्य अधिकारी केवल खानापूर्ति कर रहे हैं।

अधिकारी बोले- जो मामले लंबित उनका समाधान भी हो रहा

मामले में नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि शिविर में जो शिकायतें आ रही हैं और जिनका मौके पर समाधान हो रहा है, वह लोग तो संतुष्ट हैं। मगर जिन शिकायतों को लंबित रखा जा रहा है, उनका भी जल्द से जल्द समाधान होगा। इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। ऐसा नहीं है कि शिकायत लेकर छोड़ दिया जाता है। उसके बाद संबंधित शिकायतकर्ता को संतुष्ट किया जाता है, जो मामले लंबित है, उनका समाधान भी धीरे-धीरे हो रहा है। शिविर में कई मामले तो ऐसे होते हैं, जिनमें शिकायतकर्ता के पास अधिक प्रूफ नहीं होते हैं। अगर पूरे प्रूफ हो तो तुरंत समाधान भी हो जाए। लोगों से भी अपील है कि अपने प्रूफ साथ लेकर आएं, ताकि समाधानी में परेशानी ना हो।

चुनावों से पहले लगने वाले समाधान शिविर में भी थी यही स्थिति

चुनाव की घोषणा होने से पहले तक समाधान शिविर जिला मुख्यालय पर लगाए जा रहे थे। इसमें डीसी-एडीसी एसपी भी बैठकर सुबह 9 से 11 बजे तक शिकायतें सुनते थे। मगर चुनाव के कारण यह काम रुक गया। उस समय भी उच्च अधिकारी कुछ दिनों तक शिविर में आ रहे थे, मगर जैसे-जैसे समय बीतता गया, उच्च अधिकारियों ने आना ही बंद कर दिया। यही स्थिति इस बार भी देखने को मिल रही है।

कटवाए चक्कर तो अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई

प्रत्येक निकाय को रोज रिपोर्ट तैयार करनी होगी और इसे रोज ही मुख्यालय भेजा जाएगा। इसके लिए निर्धारित परफॉर्मा जारी किया गया है। इस परफॉर्मा में शिकायतकर्ता का नाम, पता, संपर्क, किस प्रकार की शिकायत है, उसका क्या समाधान निकाला गया और समाधान नहीं निकाला तो उसे समाधान के लिए क्या समय दिया गया है। इस पर संबंधित अधिकारी को अपने तर्क लिखकर भेजने होंगे। मुख्यालय की ओर से शिकायतकर्ताओं से भी संपर्क किया जा सकता है। यदि शिकायतों के लिए आमजन को चक्कर कटवाए गए तो भी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
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