रेवाड़ी। जिले में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई जा रही है। इस वर्ष अब तक जिले में 10 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। स्वास्थ्य समस्याएं, मानसिक तनाव, अकेलापन, सामाजिक और आर्थिक दबाव के चलते लोग आत्महत्या करने के लिए विवश होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर अंकुश लगाने के लिए मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना जरूरी है।
मनोचिकित्सकों का कहना है कि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ होते हैं। तनाव, निराशा और मानसिक दबाव उन्हें अपनी भावनाओं और परिस्थितियों पर नियंत्रण खोने पर मजबूर कर देते हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. पवन यादव ने बताया कि आत्महत्या की ओर बढ़ते व्यक्ति में अक्सर निर्णय क्षमता प्रभावित हो जाती है और वे अपनी समस्या का समाधान केवल इस मार्ग में देखते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में परिवार और मित्रों का सहयोग, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से संपर्क और समय पर काउंसलिंग जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
आत्महत्या के प्रमुख कारणों में अकेलापन, आर्थिक कठिनाइयां, नौकरी या शिक्षा में असफलता, पारिवारिक विवाद और स्वास्थ्य समस्याओं को बताया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी से व्यक्ति निराशा और अवसाद की स्थिति में पहुंच सकता है, जो आत्महत्या जैसे निर्णय की ओर ले जाता है।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि वे या उनके आसपास कोई मानसिक तनाव से जूझ रहा है, तो तुरंत विशेषज्ञ से सहायता लें और सामाजिक समर्थन प्रणाली का लाभ उठाएँ।
मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी
मनोचिकित्सक डॉ. पवन यादव ने बताया कि आत्महत्या रोकथाम के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ-साथ सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक समस्याओं को समझना भी जरूरी है। लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि मुश्किल परिस्थितियों का सामना अकेले न करें, और हमेशा किसी भरोसेमंद व्यक्ति, परिवार के सदस्य या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें। आत्महत्या रोकथाम दिवस का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना, तनाव और भावनाओं को नियंत्रित करना, और समाज में सहयोगी वातावरण बनाना जीवन बचाने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।