चौधरी बीरेंद्र सिंह नर्सिंग कॉलेज उचाना की बीएससी नर्सिंग प्रथम वर्ष की
छात्रा के साथ रैगिंग की शिकायत एक ऑफिस से दूसरे में ही चक्कर काट रही है।
डीसी ऑफिस में शिकायत किए दस दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक
उन्हें इस मामले से अवगत तक नहीं करवाया गया है। उनके ऑफिस के कर्मचारी
अपने स्तर पर ही जांच को गोलमोल कर रहे हैं। कर्मचारियों ने अपने स्तर पर
ही इस मामले की जांच 20 नवंबर को डीईओ को भेज दी जो इसके लिए अधिकृत नहीं
थे।
अब अमर उजाला में 22 नवंबर को मामला प्रकाशित होने के बाद इस
शिकायत को दोबारा वापस मंगवाया जा रहा है। हालांकि डीईओ ऑफिस के
कर्मचारियों का कहना है कि वह शिकायत तो अभी तक उनके पास आई ही नहीं। इस
तरह अभी तक छात्रा द्वारा लगाए गए रैगिंग और दुर्व्यवहार की जांच एक कदम भी
आगे नहीं बढ़ पाई है।
चौधरी बीरेंद्र सिंह नर्सिंग कॉलेज उचाना की
एक छात्रा ने 12 नवंबर को जींद के डीसी कार्यालय पहुंचकर कॉलेज में रैगिंग
करने, मारपीट करने और प्राचार्या द्वारा गाली देने के आरोप लगाए थे। उस
दिन डीसी ऑफिस में मौजूद नहीं थे तो वहां क्लर्क संजीव ने छात्रा से शिकायत
ली और बाकायदा उसे रिसिविंग दी। क्लर्क ने इस शिकायत को डीसी को दिखाने की
बजाय पूरे नौ दिन तक फाइलों में दबाए रखा। जींद डीसी राजीव रत्न ने वीरवार
को कहा कि उनके पास तो इस तरह की कोई शिकायत ही नहीं आई है। रैगिंग जैसे
गंभीर आरोपों की जांच तो प्रमुखता से करवाई जाती है।
बुधवार को डीईओ को भेजी जांच : डीसी ऑफिस
डीसी
कार्यालय के अधीक्षक श्रीनिवास ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय
को दो दिन पहले रैगिंग मामले की जांच के आदेश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि
जिला शिक्षा अधिकारी को तीन दिन के अंदर जांच करने को कहा गया था, लेकिन
उन आदेशों को शुक्रवार को वापस मंगवाया जा रहा है क्योंकि उक्त अधिकारी
कॉलेजों की जांच करने के लिए सक्षम नहीं है।
कोई शिकायत पत्र नहीं मिला : डीईओ ऑफिस
जिला
शिक्षा अधिकारी कार्यालय के स्टैनो नरेंद्र मलिक ने बताया कि डीसी
कार्यालय से शुक्रवार दोपहर को फोन आया है कि रैगिंग मामले की जांच के जो
आदेश दिए गए थे, उनको वापस भेजा जाए। उन्होंने बताया कि हालांकि शुक्रवार
सुबह तक जांच के आदेश उनके कार्यालय को नहीं मिले थे, लेकिन शाम तक आदेश
प्राप्त हो गए तो उनको वापस डीसी कार्यालय भेजा जाएगा।