हरियाणा के जिला सिरसा की नगर परिषद में प्रारंभिक जांच में ही घपले की बात सामने आ रही है। टीम अधिकारी फाइलों की जांच कर रहे हैं।
अधिकारियों के सामने ही पार्षद एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए आपस में उलझ गए। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस बल बुलाना पड़ा।
विधानसभा सत्र में सिरसा के विधायक गोपाल कांडा ने सिरसा के विकास में कथित घपलेबाजी, गलियाें के निर्माण में 30 करोड़ रुपये के गबन का मामला उठाया था।
इस पर स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक से मामले की जांच करवाने का आदेश जारी किया गया था।
इस घोटाले की जांच के लिए मंगलवार को स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक राजीव मेहता के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पहुंची।
चंडीगढ़ से आई इस टीम में मुख्य अभियंता एनके गर्ग, कार्यकारी अभियंता पंकज सैनी शामिल थे। टीम अधिकारियों ने परिषद का रिकार्ड मंगवाकर गहनता से जांच शुरू कर दी।
इसी बीच सूचना पाकर कई पार्षद भी लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह पहुंचे। विकास कार्यों पर पार्षद एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे। बात गाली-गलौच तक पहुंच गई। पार्षद रोहित गनेरीवाला ने स्थिति को संभाला।
इस मौके पर नगर परिषद अध्यक्ष सुरेश कुक्कू, पार्षद रोहित गनेरीवाला, आरटीआई कार्यकर्ता नरेश सैनी, पार्षद सीताराम बटनवाला, पार्षद रामनिवास बोमरा आदि मौजूद थे।
टीम ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी एसके गोयल को तलब कर उनसे एक साल का रिकार्ड मांगा।
टीम अधिकारियों का मानना है कि प्रारंभिक जांच में ही घपले की बात सामने आ रही है। टीम अधिकारी फाइलों की जांच कर रहे हैं।