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Panipat News: यमुना का बढ़ने लगा जलस्तर, बचाव के इंतजाम अधूरे

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पानीपत। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश के बाद यमुना नदी का जलस्तर अब बढ़ने लगा है। दो दिन में ही यमुना नदी के जल स्तर में चार गुणा की वृद्धि हुई। लेकिन, अभी तक सिंचाई विभाग द्वारा बाढ़ से बचाव के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए।
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खास बात यह है कि यमुना नदी के किनारों पर बनने वाले तटबंध का कार्य भी अभी पूरा नहीं हुआ है। तमशाबाद, राणा माजरा और खोजकीपुर में अभी काम चल रहा है। विभाग का दावा है कि जल्द काम को पूरा कर लिया जाएगा। पानीपत जिले और उत्तर प्रदेश के बीच यमुना नदी सीमा रेखा का काम करती है। बारिश के मौसम में यमुना नदी में बाढ़ का खतरा रहता है।
वर्ष 2023 में तटबंध टूटने से यमुना नदी में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। जिसके बाद 2024 में बाढ़ से बचाव के लिए 15 करोड़ रुपये की लागत से नदी के किनारे पर पत्थरों के तटबंध बनाए गए थे। लेकिन, पानी अधिक आने से तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए थे। जिस कारण इस बार तटबंधों की मरम्मत की जानी थी। इसके लिए छह करोड़ रुपये का बजट भी सिंचाई विभाग के लिए जारी हुआ था।
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जिसमें तामशाबांद में एक करोड रूपये की लागत से पत्थरों के स्टड (ठोकरों) की मरम्मत का काम किया जाना था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह काम करीब-करीब पूरा हो चुका है।
वहीं, राणा माजरा गांव में दो नए स्टड बनाए जाने थे और 500 फीट की एक रपटा बनाया जाना था। पत्थरगढ़ गांव में करीब डेढ करोड़ रुपये की लागत से पौने दो किमी में तटबंध पर ईंटों की लाइनिंग का काम किया जाना था। यह काम अभी अधूरा है।
खोजकीपुर गांव में भी एक करोड़ रुपये की लागत से यमुना नदी के में 10 स्थानों पर स्टड बनाए जाने थे। अभी यह काम भी अधूरा है। वहीं नन्हैडा गांव में 60 लाख रुपये की लागत से एक ठोकर बनाई जानी थी। वहीं दो ठोकरों की मरम्मत होनी थी और मिर्जापुर गांव में 50 लाख रुपये की लागत से स्टड बनाने काम किया जाना था। ये काम भी अभी पूरे नहीं हुए हैं।
केंद्रीय जल आयोग के जेई प्रवीन ने बताया कि पहाड़ों पर बारिश के बाद यमुना में रविवार करीब 40 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। देर शाम तक 50 हजार क्यूसिक तक बढने की संभावना है।
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