सनौली। पहाडों पर बारिश होने से हथिनी कुंड बैराज से यमुना में एक दिन पहले छोड़ा करीब 57 हजार क्यूसेक पानी सोमवार को पानीपत की सीमा में प्रवेश कर गया। यहां से दो बार में 39 और 18 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। यमुना में सोमवार रात को पुल के पास करीब 50-55 हजार क्यूसेक पानी चला।
जिले की सीमा में यमुना से सटे गांव राणा माजरा गांव में पानी ने तटबंध के अंदर खेतों में पहले ही दिन कटाव शुरू कर दिया गया है। यमुना के पानी के कटाव से जहां गांव राणा माजरा के ग्रामीण चिंतित है, वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारी कट्टे अड़ाकर कटाव को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार गांव राणा माजरा में करीब ढाई करोड़ की लागत से यमुना तटबंध पर पत्थरों की चार नई ठोकर लगनी हैं। ठेकेदार ने पत्थरों के छह डंपर मंगवा कर डाल भी दिए थे। उसके बाद दादरी से पर्याप्त पत्थर नहीं पहुंच पाया। सिंचाई विभाग ने बाढ़ बचाओ प्रबंधन के तहत अब गांव राणा माजरा में 11 स्थानों पर मिट्टी के कट्टों के स्टड लगाए जा रहे हैं ताकि यमुना का पानी कटाव करते हुए तटबंध की तरफ न आ सके।
इस बारे में सिंचाई विभाग के एक्सईएन सुरेश सैनी ने बताया कि गांव राणा माजरा में सैकडों मजदूर मिट्टी के कट्टों के स्टड लगाने को लेकर लगे हुए हैं। अब राणा माजरा में 11 स्थानों पर मिट्टी के कट्टों के स्टड लगाए जा रहे हैं और इसको लेकर युद्ध स्तर पर काम जारी है। इसके लिए जेसीबी व पोकलेन मशीनें लगाई गई है और बल्लियां आदि लाने के लिए ट्रैक्टर ट्राली लगे हुए हैं। पानीपत में बाढ़ बचाओ प्रबंधन के तहत सभी इंतजाम किए गए हैं और पत्थरों की कमी के चलते अब मिट्टी के कट्टों के स्टड लगाए जा रहे हैं। हालांकि किसी भी खतरे की कोई बात नहीं है।