गोविंद विहार, श्याम विहार और आर्य नगर कालोनी नगर निगम में शामिल हैं। इसके बाद भी इन कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। कॉलोनियों में न तो पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही पानी के निकासी के इंतजाम।
अर्से से विकास की मांग कर रहे यहां के निवासियों ने अब संघर्ष करने का निर्णय लिया है। इसके लिए बैठक कर एक सोसाइटी गठित की गई है। कालोनी में विकास करवाने और मूलभूत सुविधाओं के लिए सोसाइटी संघर्ष करेगी। इन तीनों कालोनियों में तीन हजार से अधिक लोग रहते हैं।
ये तीनों कालोनी नगर निगम की मेयर सरोज बाला के वार्ड नंबर-20 की हैं। नगर निगम बने सात साल हो चुके हैं, लेकिन इन कॉलोनियों में आज तक विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। विकास न होने से नाराज कॉलोनियों के लोगों ने मीटिंग कर सर्वसम्मति से सोसाइटी का गठन किया है।
इसे गोविंद विहार, श्याम विहार और आर्य नगर कालोनी विकास सोसाइटी ससौली जगाधरी वर्कशाप का नाम दिया गया है। इसमें विनोद शर्मा को संरक्षक और शशि प्रसाद बंदूनी को प्रधान बनाया गया है। इसी तरह सरदार तेजेंद्र सिंह बक्शी को उपप्रधान, प्रेमपाल को मंत्री, रमेश धीमान को सहमंत्री,
अखिलेश वर्मा को कोषाध्यक्ष, सरदार गुरमीत सिंह को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। कॉलोनी के जगदीश प्रसाद, महावीर सिंह और शारदा रानी को प्रचार मंत्री नियुक्त किया गया है। शोभा मेहता, राम प्रसाद, मेवा प्रसाद, रणजोर सिंह, मास्टर जेपी सिंह, हरपाल सिंह, इमरान खान, प्रमोद ढोंडियाल, सुलेख शर्मा, रघुप्रीत गुप्ता और विपिन धीमान को कार्यकारिणी सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है।
मूलभूत सुविाएं भी नहीं हैं : बंदूनी
गोविंद विहार, शयम विहार और आर्य नगर कॉलोनी विकास सोसाइटी के नवनियुक्त प्रधान शशि प्रसाद बंदूनी कहते हैं कि कालोनी में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। विकास के लिए हल्का विधायक से मिले थे। पहले उन्होंने विकास कार्य करवाने का आश्वासन दिया था।
अब उन्होंने सरकार की योजना के तहत विकास शुल्क जमा करवाने के लिए बोल दिया। कालोनी में अधिकतर परिवार मध्यम वर्ग से हैं और विकास शुल्क लाखों रुपये बनता है। इसे जमा करवाने में वह असमर्थ हैं। अब सोसाइटी बना कर विकास के लिए संघर्ष किया जाएगा।
अधिकतर गलियों में पीने का पानी भी नहीं: शारदा
प्रचार मंत्री शारदा रानी का कहना है कि यहां पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। मेन सड़क पर पाइप लाइन है, लेकिन आगे की गलियों में पाइप लाइन भी नहीं डाली गई है। कॉलोनी के अधिकतर परिवार अपने स्तर पर सबमर्सिबल पंप लगवा कर कर काम चला रहे हैं।
इसी तरह यहां पानी निकासी के लिए न तो नालियां हैं और न ही सीवरेज व्यवस्था। हल्की सी बारिश होने के बाद ही कच्ची गलियां कीचड़ से सन जाती है। इन गलियों में कई-कई फीट तक पानी जमा हो जाता है। ऐसे में यहां से निकलना तक दुश्वार हो जाता है। कोई सुनवाई नहीं हो रही।
विकास के नाम पर कुछ नहीं:
उपप्रधान सरदार तेजेंद्र सिंह बक्शी ने बताया कि निगम की मेयर उनकी पार्षद हैं। उम्मीद थी कि मेयर उनकी कॉलोनी में विकास करवाएंगी, लेकिन कालोनी में विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि मेयर से कई बार विकास कार्य करवाने की मांग लेकर मिल चुका हूं।
हर बार आश्वासन मिला कि कॉलोनी में विकास करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आश्वासन सुनते-सुनते करीब तीन साल बीत चुके हैं, मगर यहां विकास कार्य नहीं करवाया गया। इसलिए कॉलोनी के लोगों ने अब मिल कर संघर्ष करने का निर्णय लिया है।
हमारे यहां एक भी कालोनी वैध नहीं की: सिंह
सोसाइटी के सहकोषाध्यक्ष गुरमीत सिंह ने बताया कि कुछ समय पहले सरकार की ओर से 196 कालोनियों को वैध किया गया था। इनमें निगम यमुनानगर की एक भी कालोनी वैध नहीं हुई। इस बारे में भाजपा नेताओं से बात की, लेकिन गोल मोल जवाब मिला है।
अब कालोनी को वैध करने के लिए विकास शुल्क मांगा जा रहा है, जोकि पूरी तरह से गलत है। यहां के लोग एक साथ विकास शुल्क के रूप में इतनी बड़ी राशि जमा नहीं कर सकते।