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हेडलाइन: खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा यमुना का पानी, 16 गांवों की 20 हजार एकड़ फसल डूबी
24 घंटे में हथिनी कुंड बैराज से अलग-अलग समय पर छोड़ा गया 8.28 लाख क्यूसिक पानी
तटबंध पर पड़े कटाव, प्रशासन कटावों को मिट्टी से रोकने में जुटा, ग्रामीणों को दी रात में जागने की हिदायत
माई सिटी रिपोर्टर
सनौली/समालखा। वर्ष 1972 से अब तक यमुना में इस वक्त सबसे ज्यादा पानी है। यमुना नदी में पानी सोमवार को खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंच गया है। पानी बढ़ने से 16 गांवों की 20 हजार एकड़ में बोई गई सब्जी की फसल पानी में डूब गई है। स्थानीय अधिकारियों की मानें तो बीते 24 घंटे में 8.28 लाख क्यूसिक पानी अलग-अलग समय पर छोड़ा जा चुका है। यमुना नदी में पानी खतरे के निशान 230.85 को पार कर 231.80 क्यूसिक मीटर पर चल रहा है।
रविवार सुबह छह बजे ताजे वाला हेड से पानी छोड़ा जाना हुआ शुरू
ताजेवाला हेड में बीते 24 घंटे में एक-दो घंटे के अंतराल में अब तक 8.28 लाख क्यूसिकसे अधिक पानी छोड़ा जा चुका है। नदी में पहले से मौजूद पानी को मिलाने के बाद इस वक्त नदी में 12 लाख क्यूसिक पानी है। रविवार की सुबह 6 बजे ताजे वाला हेड से 2.55 लाख, फिर 11 बजे 3.11 लाख क्यूसिक पानी छोड़ा गया। जिसके बाद से एक से दो लाख क्यूसिक पानी कई बाद अंतराल में छोड़ा गया। रविवार की देर पानी पानीपत की सीमा में आना शुरू हुआ और सोमवार की सुबह तक खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंच गया। पानी और बढ़ा तो मंगलवार की सुबह तबाही मच सकती है।
- कब कितना रहा पानी
1972 - 7 लाख क्यूसेक
2013 - 8.06 लाख क्यूसेक
2019 - 8.28 लाख क्यूसेक
अपनी फसलों की डूबते देखते रहे किसान
यमुना के तटों पर खड़ी 20 हजार एकड़ की सब्जियों की फसलों में इस वक्त पानी भरा हुआ है। किसान सुबह ही तटबंध के पहुंच गए और मेहनत से उगाई गई अपनी फसलों को डूबते देखते रहे। किसान नूरदीन, महबूब, राजपाल, सतपाल, मामन, रोहतास, बलिंद्र, कृष्ण्पाल, सुभाष, राजबीर, नूरदीन, समसु, सुभाष, नरेश, रोहतास, शमशद, महाबीर ने बताया कि यमुना नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से नदी के अंदर लगे इंजन, झोपड़ियां आदि सभी डूब गई हैं। घीया और मिर्च की फसल पानी में डूबकर खराब हो चुकी है। पानी भरा रहा रहता तो सारी फसल खराब हो जाएगी।
नदी के किनारे रखवाए जा रहे मिट्टी के कट्टे
डीआरओ चंद्र मोहन, नायब तहसीलदार जगदीश चंद्र, सिंचाई विभाग के एक्सईएन सुरेश सैनी, एसडीओ कर्मबीर ने विभाग की टीम के साथ यमुना नदी के तटबंध का जायजा लिया। इस दौरान पानी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए मिट्टी के कटावों को मिट्टी के कट्टे रखकर रोकने का काम चल रहा है। यमुना से सटे गांवों का भी टीम ने जायजा लिया। गांव के सचिव और पंचायतों के जरिए बाढ़ से बचाव के इंतजाम कराए जा रहे हैं। गांव में ठीकरी पहरा लगवाया जा रहा है।
- बोले अधिकारी
सिंचाई विभाग के एक्सईएन सुरेश सैनी ने बताया कि दो दिनों से लगातार जल स्तर बढ़ रहा हैं, हालांकि अभी पानी नियंत्रण में हैं। बाढ़ से निपटने के लिए समुचित प्रबंधन किए जा रहे हैं। बाढ़ बचाव के लिए यमुना बांध पर जगह-जगह मिट्टी के कट्टों से कटावों को भरवाया जा रहा हैं। सिंचाई विभाग के एसडीओ कर्मबीर ने बताया कि कटाव को भरने का काम किया जा रहा है, जिससे पानी आगे नहीं बढ़े। नायब तहसीलदार जगदीश चंद्र ने बताया कि यमुना नदी का दौरा किया और बाढ़ प्रबंधों का जायजा लिया। फिलहाल पानी और भी बढ़ सकता है। यमुना किनारे के गांवों के ग्रामीणों को यमुना में जाने पर रोक लगा दी गई है। रात में जागते रहने की हिदायत दी गई, जिससे आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
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समालखा के गांवों का अधिकारियों ने किया दौरा
समालखा। हथिनीकुंड बैराज से यमुना में पानी छोड़े जाने के बाद एसडीएम अमरदीप जैन, तहसीलदार राम गोपाल, नायब तहसीलदार अनिल कौशिक, डीएसपी प्रदीप कुमार, एसएचओ प्रवीन कुमार ने राणा माजरा, पत्थरगढ़, बिलासपुर, गढ़ कारकौली, राकसेड़ा, हथवाला, सिम्भलगढ़, खोजकीपुर आदि गांवों का दौरा करते हुए निरीक्षण किया। एसडीएम अमरदीप जैन ने कहा कि प्रशासन किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। मिट्टी के कट्टों से कटावों को भरा गया है और जहां भी कटाव होगा, वहां कट्टे रखवा दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त ग्रामीणों को जागरूक किया गया है तथा हालात पर नजर रखें तथा उन्हें सूचित करें। ठोकरों का भी निरीक्षण कर इसको लेकर सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। डीएसपी प्रदीप कुमार ने बताया कि पुलिस की चार टीम लगाई गई हैं जो रात को गश्त करेंगी।