सनौली। पहाड़ाें पर हो रही बरसात के कारण ताजे वाला हेड से यमुना नदी में पानी छोड़ने से यमुना नदी का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है।
नदी में गत दिवस ताजे वाले हेड से छोड़ा गया एक लाख 42 हजार क्यूसेक पानी यमुना में पहुंच गया है जो धीरे-धीरे बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण तटबंध के अंदर हजाराें एकड़ में खड़ी फसल जलमग्न हो गई। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही पानी नहीं उतरा तो फसलाें में नुकसान होना तय है।
नदी में पानी चेतावनी के स्तर 230.00 क्यूसेक मीटर को पारकर 230.40 क्यूसेक मीटर पर बह रहा है और धीरे-धीरे बढ़ता जल स्तर खतरे के निशान 230.85 क्यूसेक मीटर की ओर बढ़ रहा है। नदी में बढ़ते पानी जहां किसानों और नदी से सटे ग्रामीणों की सांस फूलने लगी है।
वहीं, विभाग द्वारा नदी में बाढ़ बचाव के लिए लगाए जाने वाले पत्थरों की ठोकरें भी अभी नहीं लगाई है। पत्थर नदी के किनारे पर रखे हैं। नदी में बढ़ते जल स्तर से नदी के अंदर खड़ी करीब 10 हजार एकड़ सब्जियां घीया, पेठा, तोरी और टमाटर खराब हो गई और अन्य फसलें बर्बादी के कगार पर हैं।
ज्यादातर बाढ़ के पानी में बह गई है। वहीं करीब दस हजार एकड़ फसलें ज्वार, ईख, ढैंचा फसलें पानी में डूब गई हैं। फसलें डूबने से किसान चिंतित है। प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से अब तक नदी में पानी आने के लिए आसपास के गांव में ठीकरी पहरा लगा दिया है।
केंद्रीय जल आयोग की टीम जल स्तर पर निगाहें लगाए हैं। यमुना नदी पुल पर बने केंद्रीय जल आयोग की टीम पल-पल की खबर दिल्ली कार्यालय भेज रहे है। यमुना नदी का जलस्तर रविवार को बढ़ना शुरू हो गया था। जो मंगलवार शाम तक बढ़ता रहा है।
नदी में पानी चेतावनी के स्तर 230 ़00 क्यूसेक मीटर को पार कर 230.40 क्यूसेक मीटर पर बह रहा है और धीरे-धीरे बढ़ता जल स्तर खतरे के निशान 230.85 की ओर बढ़ रहा है। ताजे वाला हेड से यमुना नदी में एक लाख क्यूसेक मीटर पानी छोड़ा था।
पहले नदी में 1 लाख 42 हजार क्यूसेक मीटर चल रहा था । छोड़ा हुआ पानी अब यमुना पुल तक पहुंच चुका है। इस बारे में नायाब तहसीलदार बापौली राजेंद्र शर्मा का कहना है कि उन्हाेंने नदी में आए बाढ़ के पानी का निरीक्षण किया है अभी तक नदी का पानी नियंत्रण में है।
केंद्रीय जल आयोग के जेई ईश्वर सिंह शर्मा ने बताया कि अभी रात को पानी कम होने की संभावना है, अभी तक खतरे की कोई बात नहीं है।
बाक्स
यमुना नदी में आए उफान के कारण नदी से सटे राणा माजरा, पत्थरगढ़, नवादा आर, नवादा पार, गढ़ी बेसक, जलालपुर, तामशाबाद, सनौली खुर्द, रामड़ा आर, नन्हेड़ा, रिशपुर, अधमी, जलमाणा, गोयला खुर्द, मिर्जापुर, गोयला कलां, खोजकीपुर दर्जनों गांव की हजारों एकड़ ईख, ज्वार, ढांचा, घीया और पेठा फसलें पानी में डूब गई है।