शहर से निकलने वाले ड्रेन के गंदे पानी से यमुना का पानी प्रदूषित हो रहा है। इस ड्रेन में शहर के कई नाले भी मिल रहे हैं। जिनको हाईकोर्ट के पूर्व जज व एनजीटी की मॉनीटरिंग कमेटी के चेयरमेन प्रीतम पाल ने दौरा कर निगम व सिंचाई विभाग को बंद करने के आदेश भी दिए थे। जिसके बाद इन आदेशों का पालन न तो नगर निगम ने किया और न ही सिंचाई विभाग ने इनको माना। जिसके बाद एनजीटी ने इन पर सख्त कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए इनको चेतावनी पत्र जारी किया है। जिसमें इनको आदेशों की अवमानना करने का कारण बताना होगा। आदेशों में साफ लिखा है कि जवाब न मिलने पर माना जाएगा कि उपरोक्त कारणों के निगम व सिंचाई विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं और उनपर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
बता दें कि राज्य सरकार के यमुना एक्शन प्लान के तहत सिंचाई विभाग को इस मामले की रिपोर्ट तैयार कर सौंपने के आदेश जारी किए गए थे, वहीं निगम को इसमें गिरने वाली बिना ट्रीट हुए पानी के नालों को बंद करने के आदेश दिए गए थे। कमेटी चैयरमैन के दौरे के करीब चार माह बाद भी न तो निगम ने नालों को बंद कर पाया है और न ही सिंचाई विभाग इनकी कोई रिपोर्ट सौंप पाया है, जिस कारण हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा एनजीटी की गाइडलाइनस के मद्देनजर दोनों डिपोर्टमेंट को चेतावनी पत्र जारी किया गया है। इस पत्राचार में सिंचाई व निगम से महज 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
इसके अलावा बोर्ड ने निगम हुडड व सिंचाई विभाग को आदेश जारी किए हैं जिनमें स्ट्रोम वाटर ड्रेन को खुला रखने की हिदायत दी गई है। आदेशों में वर्णित है कि ये ड्रेन प्रदूषण के कारण बंद हो चुके हैं। इनसे बिना ट्रीट किया हुआ सीवरेज का गंदा पानी भी बह रहा है, जो आगे जाके नदी में मिलकर नदी के पानी को प्रदूषित करता है। इन ड्रेनों को अतिक्रमण मुक्त किया जाना चाहिए। इसके लिए जारी पत्राचार में तीनों निगम, हुड्डा व सिंचाई विभाग से सिर्फ 7 दिन में जवाब मांगा गया है।
संज्ञान में मामला, होगी कार्रवाई-
मामला संज्ञान में है। उक्त पत्राचार का जवाब निगम कार्यालय खुलने के बाद दिया जाएगा वहीं इस प्रोजेक्ट के तहत निगम की जिम्मेदारी के अंतर्गत जो कुछ कदम उठाने मुनासिब होंगे उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
सुशील कुमार, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।