अनाज मंडी में कथा करती देवी चित्रलेखा। संवाद
समालखा। नई अनाज मंडी में श्री शाम बाबा सेवा मंडल द्वारा चल रही भागवत कथा का रविवार को दूसरा दिन रहा। कथा वाचिका देवी चित्रलेखा ने अपने प्रवचन में कहा कि कथा इसलिए नहीं है कि जीवन परिवर्तित हो जाए, ये कथा सिर्फ प्रभु के आनंद को जीने के लिए है। आ जाओ कथा में और जब बैठो तब छोड़ दो प्रभु पर सब कुछ। चिंता इतनी करो कि काम हो जाए पर इतनी नहीं की जिंदगी तमाम हो। हरिनाम में व्यस्त रहिए।
उन्होंने कलयुग के आरंभ में पांडव कुल भूषण राजा परीक्षित के तपस्या रत शमीक ऋषि के गले में सर्प डालने व ऋषि पुत्र के राजा को नाग द्वारा डसने संबंधी श्राप दिए जाने की कथा भी सुनाई। ऋषियों के परीक्षित को श्राप से मुक्ति दिलाने का उपाय का वर्णन करते हुए श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को मुक्ति का सरल उपाय बताया। उन्होंने गोमाता की रक्षा करने का मूल मंत्र दिया युवाओं को प्रेरणा देते हुए उन्हें गो माता की रक्षा करने के लिए आगे आने की बात कही। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पर पहुंचकर कथा सुनी। कथा के अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया।