सरकार उद्यमियों को पीएनजी पर सब्सिडी देने से मना कर चुकी है। उधर एनजीटी ने सभी बॉयलर इस्तेमाल करने वाले उद्योगों को पीएनजी का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए है। ये पानीपत के उद्यमियों के चिंता का बड़ा विषय था। क्योंकि पीएनजी का सैट अप लगाने में 30 से 40 लाख रुपये लगते हैं। अब विश्व बैंक ने प्रदूषण कम करने के लिए पानीपत की इंडस्ट्री को सब्सिडी पर गैस उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। विश्व बैंक के अधिकारियों ने उत्तर भारत रोटर्स स्पिनर्स एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सचदेवा को कहा है कि जल्द ही विश्व बैंक की टीम पानीपत का दौरा और उसी समय उद्यमियों के साथ बैठक भी करेगी। उसी के बाद यहां पर सर्वे होगा। विश्व बैंक पता लगाएगा कि इंडस्ट्री को गैस आधारित बनाने के लिए क्या-क्या अड़चने हैं और उसका समाधान क्या हो सकता है।
उद्यमियों की समस्याएं रखीं
प्रीतम सचदेवा ने बैठक में उद्यमियों को होने वाली दिक्कतों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गैस आधारित तकनीकि में मशीनों को बदलने के लिए मोटा पैसा चाहिए। इतने पैसे छोटे उद्यमी कहां से लाएंगे। सरकार या विश्व बैंक इसमें मदद करे तभी यह सफल होगा।
35 लाख तक आएगा खर्च
एक प्लांट को गैस आधारित बनाने पर कम से कम 35 लाख खर्च आएगा। बायलर सेट को बदलने में 15 लाख, पोलिशर मशीन पर 6 लाख और सेंटनर मशीन पर 15 लाख आएगा। इसके लिए सहायता चाहिए। विश्व बैंक से बात बनती है तो यहां के करीब 12 हजार उद्यमियों को फायदा होगा। बताते हैं कि एनजीटी ने बॉयलर इस्तेमाल करने वाले सभी उद्योगों को दिए सप्लाई लेने के निर्देश दिए हैं।