पार्टी हाईकमान के इशाराें पर शहर की सरकार का आज फैसला होगा। इसमें शहर के विकास और पार्षदों की दलीलों पर पार्टी के निर्णय को समर्थन मिलेगा।
मेयर की दौड़ में तीन पार्षदों का नाम सबसे आगे हैं। इसमें पार्षद दुष्यंत भट्ट, सुरेश वर्मा और पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह हैं।
अब देखने वाली बात यह है कि शहर का सरकार का मुखिया कौन बनता है। तीनों दावेदार मेयर की कुर्सी पर अपनी-अपनी दावेदारी कर रहे हैं। चुनाव से पहले पार्टी ऑब्जर्वरों ने पार्षदों की नब्ज टटोली और जाना किसके पक्ष में ज्यादा पार्षद हैं।
तीनों का दावा, पार्टी का समर्थन उन्हें
हाईकमान के इस निर्णय के बाद मेयर पद के लिए पार्षदों में चल रही आपसी गठजोड़ की राजनीति भी समाप्त हो गई है। मेयर पद के तीनों दावेदार पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह, दुष्यंत भट्ट और सुरेश वर्मा ने भी पार्टी के निर्णय का समर्थन करने की बात की है।
हाईकमान के इस निर्णय से शहर में चल रही गठजोड़ की राजनीति पर पूर्ण विराम लगा है। हालांकि विरोधी खेमे में बुल्लेशाह समर्थित पार्षदों ने अभी तक कोई सहमति या असहमति नहीं जताई है। इसलिए इस चुनाव में एक बहुत पड़ा सस्पेंस बाकी है।
हालांकि भाजपा के पास अपने 15 पार्षदों का बहुमत होने से पार्टी का मेयर बनना तो सुनिश्चित है। लेकिन एक ही पार्टी के तीन उम्मीदवार मैदान में होने से अभी तक शहर के मुखिया की तस्वीर स्पष्ट नहीं है।
दुष्यंत, भूपेंद्र सिंह की जंग में सुरेश आगे
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही मेयर पद की दावेदारी ठोक रहे दुष्यंत भट्ट और मेयर भूपेंद्र सिंह की जंग में तीसरे दावेदार सुरेश वर्मा सबसे आगे हैं।
यदि मेयर पद के चुनाव में तीनों दावेदार मैदान में उतरे तो मुखिया का सेहरा सुरेश वर्मा के सिर बधने की ज्यादा उम्मीद है। लेकिन मेयर पद नाम का फैसला हाईकमान के हाथों में होने और पार्षदाें का पार्टी को समर्थन देने की सहमति से बाजी पलटने के असार हैं।
मेयर पद के लिए पार्षद एकमत नहीं
मेयर पद के लिए पार्षदों की टोह लेने पहुंचे पार्टी के ऑब्जर्वर मनीष ग्रोवर और राजीव जैन ने पार्टी के 15 पार्षदों से देर रात तक रायशुमारी की। लेकिन पार्षदों के एकमत न होने पर पार्टी हाई कमान ने मेयर पद के नाम एनाउंस करने का निर्णय अपने हाथों लिया।