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हम किसी से कम नहीं...नारी शक्ति कर रही प्रमाणित

Wed, 08 Mar 2017 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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पानीपत - फोटो : पानीपत
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यमुनानगर। आदिकाल से ही नारी शक्ति सामाजिक परिवर्तन की अग्रदूत रही हैं। देश की आजादी के लिए झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने ब्रिटिश हुकूमत के दांत खट्टे किए, तो मदर टेरेसा ने प्रेम का संदेश दिया। अंतरिक्ष पर कल्पना चावला की उड़ान और धरती पर किरण बेदी के जज्बे को सभी ने सलाम किया। हर हालात से जूझकर नारी ने यह प्रमाणित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं हैं। आज भी अधिकांश चूल्हा-चौका छोड़े बगैर हर क्षेत्र में वर्चस्व बनाए हुए हैं।
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जिले में अगर शहर से लेकर गांवों तक के विकास में महिलाओं की भूमिका की बात हो, तो उसमें महिलाओं की भूमिका अग्रणी हैं। नगर निगम यमुनानगर/जगाधरी में कुल 20 में नौ वार्ड ऐसे हैं, जिनकी कमान पार्षद के तौर पर महिलाएं ही संभाले हुए हैं। इनमें वार्ड नंबर-20 से पार्षद सरोज बाला नगर निगम की मेयर भी हैं। इसके अलावा गांवों के कामकाज की बात करें, तो वहां भी महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं खड़ी हैं। जिले में कुल 471 ग्राम पंचायते हैं, इनमें 212 सरपंच की सरपंच महिलाएं हैं। वहीं, 3607 पंच पदों पर 1634 महिलाएं काबिज हैं। इसके अलावा ब्लॉक समिति के 138 वार्ड में 61 और जिला परिषद् के 18 पदों में चेयरपर्सन रेणु बाला समेत 7 पर महिलाएं सदस्य हैं। इनमें से अधिकांश घर को संभालने साथ अपने क्षेत्र के विकास के लिए भी पूरजोर भाग-दौड़ कर रही हैं। यानि चूल्हा-चौका छोड़े बगैर ये महिलाएं अपने-अपने पद पर काम कर जिले में वर्चस्व स्थापित किए हुए हैं।
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इन महिलाओं कांधे पर हैं नौ वार्डों की कमान: वार्ड-2 से निशा देवी, वार्ड-3 से पूनम रानी, वार्ड-6 से प्रीति जौहर, वार्ड-8 से संगीता सिंघल, वार्ड-12 से प्रिया, वार्ड-14 निर्मला चौहान, वार्ड-17 से सूशल जावला, वार्ड-20 से सरोज बाला पार्षद हैं।
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ब्लॉक    पंचायत    महिला सरपंच
जगाधरी    67    31
छछरौली    122    62
मुस्तफाबाद    75    34
बिलासपुर    95    36
साढौरा    43    19
रादौर    69    30        
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ब्लॉक    समिति    महिला सदस्य
रादौर    24    13
साढौरा    14    06
मुस्तफाबाद    22    08
जगाधरी    22    10
बिलासपुर    26    11
छछरौली    26    13
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सरकारी विभागों के उच्च पदों पर भी कार्यरत
जले में कई सरकारी विभागों के उच्च पदों पर भी महिलाएं कार्यरत हैं। इनमें सीटीएम रुचि सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी सरोज देवी, जिला वन अधिकारी निवेदिता, जिला बालकल्याण अधिकारी मनीषा खन्ना, नायब तहसीलदार चुनाव आंचल, नगर निगम मेयर सरोज बाला, महिला थाना डीएसपी उषा रानी, एसएचओ इंस्पेक्टर कुलबीर कौर और अन्य कई शामिल हैं।

इनसर्ट स्टोरी-
कभी सिर्फ आंखें कर रहीं थी काम, अब खुद के साथ दूसरों को भी कर रहीं पैरों पर खड़ा
राहुल शर्मा
यमुनानगर। जिंदगी में एक वक्त ऐसा था कि सिर्फ आंखें काम कर रही थी और पूरा शरीर बेजान पड़ गया था। लेकिन, जिंदगी जीने के आस में न सिर्फ खुद को पैरों पर खड़ा किया, बल्कि दूसरों में भी यह जज्बा पैदा किया। हम बात कर रहे हैं प्रोफेसर कॉलोनी की रितु सोनी की, जिन्होंने छह माह की उम्र में पोलियो ग्रस्त होने के बावजूद 50 वर्षों की संघर्षभरी जिंदगी में अपनी अलग पहचान बना डाली। कहते हैं प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती और उसकी महक चारों दिशाओं में फैलती है। यह कहावत रितु सोनी पर बिल्कुल साटीक बैठती है। रितु सोनी बताती हैं कि छह माह की उम्र से वह पोलियो से ग्रस्त हैं। उनकी माता उषा सोनी और पिता केवल कृष्ण सोनी ने बचपन में ही उन में जीने की आस जगाई। कभी एक वक्त ऐसा था कि उनका पूरा शरीर बेजान था और दूसरों से बातचीत का सिर्फ आंखें ही जरिया रह गई थीं। जब वह छठी कक्षा में थी, तब ऑपरेशन हुआ और आधे शरीर पर प्लास्टर था। बावजूद उन्होंने हाथ से किताब नहीं छोड़ी और पेरेंट्स ने भी स्कूल भेजना जारी रखा। जब वह छोटी थी तो भाई अनिल सोनी और उनकी सहेलियों ने भी उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि उन्हें कोई बीमारी है। भाई जब फुटबॉल खेलते थे तो भी उसे खेल में शामिल कर गोल किप्पर बना देते थे। पढ़ने की जिद में ही वह अपने समय में नॉर्थ इंडिया के कॉलेजिस में अकेली ऐसी थी, जिन्होंने पीएचडी इन कंप्यूटर्स की। इसके अलावा उन्होंने एमएससी फिजिक्स स्पेशलाइजेशन इन इलेक्ट्रॉनिक्स और पीजी डिप्लोमा इन मॉस कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। बचपन से लेकर पढ़ाई के क्षेत्र में अव्वल रहने पर कई मेडल व इनाम भी जीते।  वह 1989 से गुरुनानक गर्ल्स कॉलेज में कंप्यूटर्स डिपार्टमेंट की एचओडी हैं। इसके अलावा बतौर एनसीसी ऑफिसर सहित कॉरियोग्राफी, लीडरशिप कैंप, थियेट्र्स में भी उनकी अहम भूमिका रहती है। कंप्यूटर पर रिसर्च वर्क को लेकर वह श्रीलंका, यूएसए, जापान व अन्य कई देशों में हुए कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुकी हैं। उन्होंने न केवल खुद को पैरों पर खड़ा किया बल्कि मौजूदा समय में आरोहण वेलफेयर एसोसिएशन की वह अध्यक्ष हैं। एसोसिएशन द्वारा दिव्यांग लोगों को कृत्रिम अंग दिए जाते हैं और अब तक सौ से अधिक लोगों को कृत्रिम अंग दिए जा चुके हैं। यानि रितु सोनी ने 50 वर्ष की संघर्ष भरी जिंदगी में न केवल खुद को पैरों पर खड़ा किया, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही हैं वहीं, वह रोटरी क्लब से जुड़कर समाजसेवा के क्षेत्र में कई कार्य कर रही हैं और खासकर दिव्यांगों के स्वयंरोजगार के लिए कई तरह की गतिविधियां करवा रही हैं।
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