थर्मल के खुखराना की शिफ्टिंग को लेकर आयोजित पंचायत ने निर्णय लिया कि अगर नई साइट पर उनके गांव का शिलान्यास चुनाव से पहले नहीं हुआ तो वे वोट नहीं डालेंगे।
बताया कि यह कोरी धमकी नहीं है बल्कि वे पहले भी सरपंच के चुनाव का बहिष्कार कर चुके हैं। रविवार को गांव में आयोजित पंचायत में काफी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।
पंचायत में ग्रामीणों ने कहा कि तीन साल से उन्हें बहकाया जा रहा है। गांव के हालात खराब होते जा रहे हैं। थर्मल से उड़कर आने वाली राख से हर घर में बीमार की संख्या बढ़ रही है।
पशु भी बीमार हो रहे हैं लेकिन हमारी कोई सुध नहीं ले रहा। रोज सैकड़ों टन राख व सीमेंट गांव, खेतों व आसपास के इलाकों में गिर रही है।
ग्रामीण सूरजभान, हवासिह, पाले राम, रामकुमार, सतबीर, टीटी, बृजपाल, रामधारी, प्रेमो, मुनेष, पूजा, नीलम, रानी ने बताया कि वे तंग हो चुके हैं। इसी कारण ये फैसला किया है
मुआवजा पूरा नहीं मिला, गांव नहीं छोड़ेंगे
गांव निवासी हरिसिंह ने कहा कि उसकी 600 गज जमीन कम कर दी और मुआवजा भी कम दिया जा रहा है। जब तक मुआवजा पूरा नहीं मिलता और जमीन नहीं दी जाती तब तक उनका परिवार गांव छोड़कर नहीं जाएगा। सरपंच पति तेजबीर ने बताया कि ग्रामीणों का अपना फैसला है।
वोट देना लोकतंत्र को मजबूत करना है। जिला कष्ट निवारण समिति के सदस्य सतपाल रोड ने बताया कि गांव का नक्शा बन चुका है जल्द ही गांव शिफ्ट होने वाला है।