संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से जिले में सबसे ज्यादा इसराना खंड में दो एमएम, समालखा और मतलौडा में एक-एक एमएम और पानीपत व बापौली में शून्य एमएम बारिश हुई। बूंदाबांदी होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। गेहूं व सरसों उत्पादक किसानों को फसल खराब होने का डर सताने लगा है। मौसम विशेषज्ञ ने सोमवार को बारिश के आसार जताए हैं।
उधर, बारिश से मंडी पहुंच रहे किसानों की भी चिंता बढ़ गई है। मंडी पहुंचे किसानों का कहना है कि पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण फसलों के बारिश में भीगने का खतरा है।
रविवार को सुबह ही आसमान में बादल छाए रहे। करीब आठ से नौ बजे के बीच बारिश हुई। बारिश के बाद हवा की रफ्तार बढ़ गई जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ी। रविवार को अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की रफ्तार 14 किलोमीटर प्रति घंटा रही। परढ़ाना निवासी अजीत और विक्की ने बताया कि उन्होंने सरसों की कटाई कर दी है जो खेत में पड़ है। वहीं गेहूं की फसल की कटाई करीब दस दिन में शुरू हो जाएगी ऐसे में बारिश होने से किसानों के दिलों की धड़कन बढ़ रही है। यदि इस समय बारिश होती है तो गेहूं का दाना काला पड़ने का डर बढ़ जाएगा वहीं सरसों की कटी पड़ी फसल खेत में पानी में खराब हो सकती है।
हवा की रफ्तार बढ़ने से गेहूं की कटाई के लिए तैयार फसल जमीन पर बिछ सकती है जिससे पैदावार प्रभावित होगी। इस समय न तो बारिश होनी चाहिए और न ही हवा की रफ्तार बढ़ने चाहिए। यही किसानों और फसलों के लिए सही है। कृषि विज्ञान केंद्र उझा के मौसम विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि सोमवार को फिर से बारिश हो सकती है। वहीं पूरा सप्ताह बादलों की आवाजाही लगी रहेगी। इस समय बारिश होने से सरसों की गेहूं की खड़ी फसल को ज्यादा नुकसान हो सकता है वहीं सरसों की कटी फसल पानी में रहकर खराब हो सकती है।