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गांवों में वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगा पानी को करेंगे रिचार्ज

Sat, 29 Apr 2017 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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यमुना बेल्ट के समालखा, बापौली व सनौली खंड में डार्क जोन में गए ग्राउंड वाटर को ऊपर लाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। इसको लेकर तीनों खंडों के गांवों में वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगाकर ग्राउंड वाटर को रिचार्ज किया जाएगा। प्राथमिक स्तर पर खंडों के 17 गांवों में वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इन पंचायतों में लगने वाले हारवेस्टिंग सिस्टम पर 357.50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें अकेले समालखा खंड के सात गांवों को वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगाने को लेकर चयनित किया गया है। इन पर करीब 185.50 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगाया गया है।
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उपजाऊ खेती व अच्छे उत्पादन की श्रेणी में आने वाले समालखा, बापौली व सनौली क्षेत्र डार्क जोन में चले गए हैं। यहां पर तीन सौ व चार सौ फीट की गहराई पर लगे सबमर्सिबल तक जवाब देने लगे हैं। ग्राउंड वाटर के लगातार नीचे चले जाने के चलते प्रशासन से लेकर किसान खासे चिंतित हैं। किसानों को हर साल सबमर्सिबल मोटर की कैपेसिटी बढ़ाने व बोर को नीचे करने की चिंता रहती है, वहीं प्रशासन आने वाले दिनों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन ने इस दिशा में काम करना भी शुरू कर दिया है। प्रशासन ने समालखा, बापौली व सनौली खंड के गांवों में वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगाने का फैसला लिया है।

यहां-यहां पर इतनी लागत से लगेंगे हारवेस्टिंग सिस्टम
गांव का नाम     ब्लाक    राशि रुपये
हथवाला    समालखा    25 लाख
राक्सेड़ा    समालखा    32.50 लाख
कारकोली    समालखा    29 लाख
चुलकाना    समालखा     41 लाख
महावटी     समालखा    10 लाख
बिहौली     समालखा    29 लाख
गढ़ी छाजू     समालखा    19 लाख
मतरौली    बापौली    25 लाख
संजौली    बापौली     27 लाख
पसीना खुर्द     बापौली     30 लाख
झांबा     बापौली     09 लाख
मोहाली    बापौली    21 लाख
सनौली    बापौली    08 लाख
बापौली    बापौली    08 लाख
कुराड़     बापौली    17 लाख
जलालपुर    बापौली    27 लाख
कुल    17     357.50 लाख
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ये दो मामले बताते हैं हकीकत
मामला नंबर-एक
2012 के बाद ट्यूबवेलों के कनेक्शन नहीं
सरकार द्वारा बापौली व समालखा ब्लाक के जमीनी पानी की स्थिति सुधारने या उसी स्तर पर रखने को लेकर कई दिशा में काम शुरू किया है। बिजली निगम द्वारा दोनों खंडों में नए ट्यूबवेल कनेक्शन पर रोक लगाई गई है। निगम ने इस श्रेणी में 2012 में सिक्योरिटी जमा कराने वाले लोगों को भी शामिल किया है। वहीं 2012 में सिक्योरिटी राशि जमा कराने वाले लोग टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कनेक्शन न मिलने पर परेशान हैं। दोनों खंडों के करीब 50 किसान ट्यूबवेल के कनेक्शन लेने को लेकर बिजली निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
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462 करोड़ रुपये का रैनीवेल प्रोजेक्ट अटका
यमुना बेल्ट के डार्क जोन में चले जाने पर शहर को स्वच्छ पानी मुहैया कराने वाला 462 करोड़ का रैनीवेल प्रोजेक्ट अधर में लटक गया है। जन स्वास्थ्य विभाग प्रोजेक्ट की मंजूरी न मिलने पर शहर में ट्यूबवेल लगवाने की तैयारी में है। शहर का यह प्रोजेक्ट 2005 से अटका हुआ है। इससे पहले इसको कैनाल बेस प्रोजेक्ट का नाम दिया था। इसके अंतर्गत पश्चिमी यमुना लिंक नहर से शहर को पानी सप्लाई दी जानी थी, लेकिन दिल्ली जल समझौते के चलते यहां पर प्रोजेक्ट नहीं लग सका। इसके बाद यमुना किनारे पर रैनीवेल प्रोजेक्ट लगाने का फैसला लिया था।

सबमर्सिटल ट्यूबवेल भी लगातार तोड़ रहे दम
समालखा व बापौली क्षेत्र में सरकारी सबमर्सिबल ट्यूबवेल भी लगातार दम तोड़ रहे हैं। समालखा खंड में पिछले दिनों में 15 ट्यूबवेल फेल हो चुके हैं। ये सब ट्यूबवेल तीन-तीन सौ फीट पर लगे हुए थे। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अब नए सिरे से ट्यूबवेल लगाने की तैयारी में है। इस बार करीब एक हजार फीट पर सबमर्सिबल लगवाए जाएंगे। फिलहाल दोनों खंडों में जमीनी पानी को लेकर चिंता बनी हुई है।

समालखा, बापौली व सनौली खंड में ग्राउंड लेवल डार्क जोन में चला गया है। इन खंडों के कुछ गांवों में वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगाने की योजना है। इसको लेकर जिला में काम चल रहा है।
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राजीव मेहता, एडीसी, पानीपत।
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