पानीपत। सिविल अस्पताल में बिना पर्ची दिए रेबीज के इंजेक्शन लगाकर भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच भी शुरू हो गई। विजिलेंस की टीम ने सिविल अस्पताल से रेबीज विंग का रिकार्ड खंगाला है। वहीं दूसरी ओर पीएमओ ने जो 10 दिन पहले जांच कमेटी गठित की थी, उसने अभी तक जांच शुरू नहीं की है। कमेटी के अध्यक्ष का कहना है कि वह अस्पताल के दूसरे कामों में व्यस्त हैं इसलिए जांच नहीं कर सके।
गौरतलब है कि 22 मार्च को सिविल अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन लगाने में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया था। रेबीज विंग में काम करने वाले कर्मचारी लोगों से पैसे लेकर बिना पर्ची के रेबीज के इंजेक्शन लगाते मिले थे। एक ही दिन में ऐसा 15 लोगों के साथ किया गया था। पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने मामले की जांच डिप्टी एमएस को सौंपी थी।
भारत नगर निवासी मनोहर व गांव गढ़ी बेसिक निवासी अमरीश ने 22 मार्च को पीएमओ को शिकायत देते हुए कहा था कि उन्होंने अस्पताल से रेबीज के चार इंजेक्शन लगवाए हैं। उनसे हर इंजेक्शन के 100 रुपये लिए गए हैं, लेकिन उन्हें इस संबंध में कोई पर्ची नहीं दी गई। आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने ये पैसे अपनी जेब में डाल लिए हैं। इस मामले की अब तक निष्पक्ष जांच नहीं हो पाई है।
हम जांच कर रहे हैं
मामले की जांच में कुछ देरी हुई है। हम मामले की जांच कर रहे हैं। जांच में जो भी दोषी होगा कार्रवाई निश्चित है। विजिलेंस जांच की उन्हें जानकारी नहीं है। -डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी एमएस, सिविल अस्पताल