बिजली निगम के तकनीकी कर्मचारी फील्ड में जाकर लाइनों पर काम करने के बजाय कार्यालयों में पंखों की हवा तले अधिकारियों की मुंशीगीरी कर रहे हैं।
जबकि फील्ड में तकनीकी स्टाफ कम होने चलते समय पर लाइनों की मेंटेनेंस नहीं हो पा रही है। इसका खामियाजा अंतत: शहर की आम जनता का ही भुगतना पड़ रहा है।
निगम के सभी सब डिविजनों में करीब छह से सात तकनीकी कर्मी जेई और एसडीओ स्तर के अधिकारियों की मुंशीगीरी कर रहे हैं।
जो मीटरों की फाइलें पास करवाने एस्टिमेट की जांच का काम कर रहे हैं। लेकिन नियम के मुुताबिक तकनीकी कर्मी का फील्ड में होना जरूरी होता है। लेकिन अफसरशाही के सामने नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। निगम कार्यालयों में लगभग सभी जूनियर इंजीनियरों ने अपने पास लाइनमैन या असिस्टेंट लाइनमैन को मुंशी बनाकर रखा है।
जो फील्ड में जाने के बजाय कार्यालय में उनके कार्यों पर मोहर लगा रहे हैं। ऐसे में फील्ड में काम करने वाले तकनीकी स्टाफ की संख्या जरूरत के मुताबिक दस प्रतिशत से भी नीचे आ गई है।
सर्कल में करीब 30 से 35 तकनीकी कर्मी जेई और एसडीओ स्तर के अधिकारियों की मुंशीगीरी कर रहे हैं। इससे फील्ड में तकनीकी कर्मचारियों की न के बराबर रह गई है।
ऐसे में यदि कोई लाइन फाल्ट आ जाए तो घंटों तक इंतजार करने के बाद भी कोई बिजली कर्मी नहीं पहुंचता। ऐसे में लोगों को पैसे देकर बाहर से प्राइवेट बिजलीकर्मी बुलाने पर मजबूर होना पड़ता है।
उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए निगम की ओर से बनाए शिकायत केंद्र पर एक भी तकनीकी कर्मी नहीं है। जब भी लाइन या किसी उपभोक्ता के मीटर में फाल्ट आता है तो कमीशन पर काम करने वाले बिजली कर्मी वहां पर पहुंच जाते हैं। जो काम के बदले उपभोक्ताओं से पैसे लेते हैं।
तकनीकी कर्मियों की ड्यूटी फील्ड में होती है। अभी तक उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं है। फिर भी मामले की जांच की जाएगी, यदि कोई इसमें दोषी मिला तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।
बीएस गर्ग, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम