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पुराना मकान गिरा, कई मकानों का रास्ता बंद

Sat, 25 Jul 2015 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
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शहर के मेन बाजार में शनिवार दोपहर को एक पुराना मकान भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि उस वक्त मकान में कोई भी व्यक्ति नहीं था।
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इससे एक बड़ा हादसा होने से बच गया। मकान का मलबा पहले से ही तंग गली में गिरने पर पीछे के करीब एक दर्जन मकानों का रास्ता बंद हो गया और प्रशासन और नगर निगम की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया। लोगों ने अनदेखी पर रोष व्यक्त किया और मलबे को गली से हटवाने की मांग की।

मकान शनिवार दोपहर के वक्त गिरा। मेन बाजार स्थित आरपी गैस एजेंसी के साथ लगती गली स्थित एक पुराना मकान धड़ाम के साथ गिर गया। मकान गिरते ही आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया और लोग बाहर निकलकर आए।
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लोगों ने मकान गिरने की सूचना प्रशासनिक और नगर निगम अधिकारियों को दी।

मकान को लेकर मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद चल रहा है। मकान के जर्जर होने का एक बड़ा कारण उन दोनों के बीच विवाद होना भी है। लोगों ने बताया कि रोशनलाल का मेन बाजार में मकान है और वह लंबे समय से दिल्ली में रह रहा है।

उसके बाद उनकी जान पहचान वाला किराये पर रहने लगा। अब मकान को लेकर दोनों पक्षों में विवाद चल रहा है, लेकिन मकान कंडम होने पर दोनों में से कोई भी नहीं रह रहा।

बरसात में कंडम भवन का गली में निकला लेंटर हादसों का कारण बन सकता था। स्थानीय लोगों की मांग पर बाहर निकले लेंटर को तोड़ दिया गया। उन्होंने वहां से मलबा हटा दिया और मकान की स्थिति देखते हुए संभलकर रहने की हिदायत दी।

जर्जर मकान का मलबा गली में गिरने पर आगे के करीब एक दर्जन मकानों का रास्ता बंद हो गया। लोगों ने मलबा हटाने में प्रशासन और नगर निगम की अनदेखी पर रोष व्यक्त किया। स्थानीय निवासी मनोज, रविंद्र कुमार, प्रवीण कुमार, अरविंद शर्मा, सुभाष वर्मा, पंकज बिंदल, अनिल शर्मा और बबलू सिंगला ने रोष व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि मकान मालिक दिल्ली रहता है। लेकिन पानीपत के खंडहर हुए मकान की देखरेख नहीं की जा रही। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि किराएदार भी मकान कंडम होने पर दूसरी जगह जाकर रहने लगा।
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बारिश ने पुराने भवनों को खोखला कर दिया है। जिससे आए दिन मकान गिरने और दरार आ रही है। गत सप्ताह बारिश में हाली की हवेली का बड़ा हिस्सा गिर गया था। इसमें भी मलबा गली में आकर गिर गया था और लोगों ने रास्ता जाम होने पर रोष व्यक्त किया था। इसके दो दिन बाद हवेली में फिर से दरार आ गई और कई दिन पहले भी दरार आ गई थी।
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