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Panipat News: घट रहा गोबर खाद का प्रयोग, बढ़ रही बंजर धरा

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पानीपत। अच्छी पैदावार पाने के फेर में किसान रासायनिक खादों का अधिक प्रयोग कर रहे हैं। जबकि हरी और गोबर की खाद का प्रयोग कम करने लगे हैं। ऐसे में जमीन में आर्गेनिक कार्बन तेजी के साथ कम हो रहे हैं। जिससे जमीन बंजर होती जा रही है। किसान रासायनिक खादों का प्रयोग इसी तरह करते रहे तो आने वाले 10-15 साल में ज्यादातर जमीन बंजर हो जाएगी। ऐसी स्थिति में लोगों के पास खाने तक को अनाज पैदा नहीं हो पाएगा।
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विश्व पृथ्वी दिवस मंगलवार को है। इस बार इसका थीम हमारी शक्ति, हमारा ग्रह है। औद्योगिक नगरी पानीपत में उद्योगों और शहरों के लगातार बढ़ने के बाद कृषि योग्य जमीन तेजी के साथ घट रही है। शहर के आसपास की बात करें तो करीब एक हजार एकड़ जमीन पर कॉलोनी काट दी गई हैं। यहां अब खेती के बजाय मकान बन रहे हैं। इन सबके बीच शेष जमीन पर भी उर्वरा शक्ति तेजी के साथ कम हो रही है। जिले में कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल करीब 2.53 लाख एकड़ है। मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने में अहम भूमिका कार्बनिक पदार्थों की होती है। अच्छी उपजाऊ योग्य भूमि में 0.25 से 0.5 प्रतिशत कार्बनिक पदार्थ होना चाहिए। खेतों में फसलों के अवशेष जलाने से कार्बनिक पदार्थों की कमी होने लगी है। मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम होने से औसतन पैदावार में भी कमी आने लगी है।
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