पानीपत। सार्वजनिक विकास कार्यों और सुविधाओं को देखते हुए सदन की बैठक में दो पार्षदों ने कुछ प्रस्ताव भेजे थे लेकिन निगम ने इनको सदन के एजेंडों में शामिल ही नहीं किया। जिससे नाराज इन पार्षदों ने सदन की बैठक का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। इनमें वार्ड नंबर 18 के पार्षद बलराम मकौल और वार्ड नंबर 8 की पार्षद चंचल सहगल शामिल हैं। इनका कहना है कि जब वे निगम सदन के समक्ष तक शहर के लोगों की समस्याओं को नहीं रख सकते तो ऐसी बैठक का क्या फायदा। दोनों पार्षदों ने निगम कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल दागते हुए इसे फेल करार दिया है।
इस मुद्दे को शामिल न करना हैरान करने वाला मामला- मकौल
हमारे वार्ड की 12 कॉलोनियों के 35 हजार लोगों ने 40 साल से शुगर मिल की गंदगी और बदबू को बर्दाश्त किया है। अब ये मिल शिफ्ट होने जा रहा है तो इसकी जमीन पर एचएसवीपी की ओर से आवासीय कॉलोनी प्रस्तावित है। इस जमीन में उन्होंने कुछ हिस्सा शहर के लोगों के लिए पार्क, अस्पताल, स्कूल व थाने के लिए मांगा था लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया है। इससे हमारे वार्ड के साथ अन्य वार्ड के लाखों लोगों को फायदा मिलना था, पता नहीं क्यों इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए बैठक का बहिष्कार किया गया है।
बलराम मकौल, पार्षद वार्ड नंबर 18
20 प्रस्ताव भेजे नहीं किया शामिल- सहगल
मेयर कार्यालय में 20 प्रस्ताव भेजे थे। इसके अलावा शहर के सार्वजनिक मुद्दों में प्रॉपर्टी आईडी और सफाई के टेंडर को शामिल किया गया था लेकिन इनमें से किसी भी एजेंडे को शामिल नहीं किया गया। इसलिए हम इस बैठक का बहिष्कार करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में आज तक निगम सदन की बैठकों में जितने प्रस्ताव पास हुए हैं, उनमें से कितने पर काम हुआ है, केवल इस पर अधिकारियों ओर मेयर से जवाब तलब किया जाना था। हर बार उनके वार्ड के लोगों के साथ ये भेदभाव क्यों किया जा रहा है इसका जवाब मांगा जाएगा।
चंचल सहगल, पार्षद, वार्ड नंबर 8
मुख्य मुद्दों को किया शामिल, बाकी भी सौंपेंगे- मेयर
निगम सदन की पावर एक करोड़ रुपये की है। इसलिए शहर के सभी वार्डों के एक जैसे बड़े मुद्दे ही एजेंडे में शामिल किया गया है। इसके अलावा जिन पार्षदों की ओर से बाकी के अलग से मुद्दे आए हैं, उनको निगम आयुक्त को अलग से सौंप दिया जाएगा। किसी भी वार्ड के गली, नाली, सड़क आदि के मुद्दे इसमें शामिल नहीं किए गए हैं। समय सीमा को देेखते हुए ऐसा किया गया है क्योंकि अगर सभी पार्षद सदन में 10-10 मुद्दे भी लाते हैं तो ये भी 260 से ज्यादा हो जाएंगे। सभी पर विचार नहीं हो पाएगा। इसलिए सदन की बैठक में केवल मुख्य मुद्दों पर ही विचार होगा। -अवनीत कौर, मेयर, नगर निगम, पानीपत।