पानीपत। गांव बापौली के गांव राणा माजरा की दो आंगनबाड़ी की इमारत बारिश में ढह गई। मौके पर केवल समतल जगह है। आंगनबाड़ी वर्करों ने बताया कि आंगनबाड़ी तो दो महीने पहले आई तेज बारिश में ढह गई। आंगनबाड़ी में रखा सामान भी टूट गया। राणा माजरा में एक ही घर में दो आंगनबाड़ी थीं। आंगनबाड़ी ढह जाने के बाद से अब राणा माजरा में कोई आंगनबाड़ी नहीं है। बचे सामान को आंगनबाड़ी वर्करों ने दूसरों के घर में रख दिया है, लेकिन अब वे भी कह रहे हैं कि सामान उठाओ।
राणा माजरा की यह आंगनबाड़ी 200 रुपये प्रति माह के हिसाब से किराए पर ली हुई थी। यह मकान एक गरीब महिला का है, जिसमें केवल वह और उसकी दो बेटियां रहती थीं। गुजारा चलाने के लिए उन्होंने घर के कमरों को किराए पर दे दिया था। आंगनबाड़ी कर्मचारी का कहना है कि सरकार के अनुसार 750 रुपये किराया है, लेकिन उनको केवल 200 रुपये दिए जाते हैं, जिसमें उनको जर्जर मकान ही किराए पर मिलते हैं। संवाद
मंडरा रहा है खतरा
आंगनबाड़ी वर्कर का कहना है कि इस महंगाई के समय में जहां 200 रुपये में रसोई तक किराए पर नहीं मिलती है। विभाग उनको कमरा किराए पर लेने को कहता है। जैसे तैसे वह कमरा किराए पर ले लेती हैं तो वह जर्जर और पुराना मिलता है। राणा माजरा में भी आंगनबाड़ी गिरते वक्त वहां पर कोई कर्मचारी व नौनिहाल नहीं था, नहंीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। अगर जर्जर इमारत में बच्चे पढ़ाए जाएंगे तो उनकी जान को खतरा है।
कई बार शिकायत दे चुके हैं पर कोई सुनवाई नहीं : रावल
राणा माजरा की आंगनबाड़ी ढह जाने के बाद कई बार बाल योजना अधिकारी को शिकायत कर चुुके हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हो पाई है। सरकार को नन्हें बच्चों को ध्यान में रखते हुए सही किराया देना चाहिए नहीं तो सही कमरा खुद बनवाकर देना चाहिए।
-संतोष रावल, आंगनबाड़ी जिला प्रधान व राज्य उपप्रधान
सरकार के अनुसार जिन आंगनबाड़ी में कमरे, रसोई और टॉयलेट लिए हैं। सरकार के निर्देशानुसार तय राशि 750 रुपये दी जा रही है।
-राजबाला, डीपीओ, आंगनबाड़ी पानीपत