हरियाणा के जिले कैथल के हलके राजौंद में हेपेटाइटिस के साथ-साथ अब एचआईवी पॉजिटिव की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। खंड के पंद्रह गांवों में जांच के बाद अब तक बीस एचआईवी पॉजिटिव मिले।
एड्स काउंसलर अनूप कौशिक ने बताया कि 2013 के सितंबर माह तक खंड के 15 गांवों में 2352 लोगों की जांच की गई है। इनमें से 20 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्हाेंने बताया कि यह अब तक लाइलाज बीमारी है। मेडिकल साइंस में अब तक कोई भी इलाज संभव नहीं है। इसमें केवल बचाव ही एक मात्र इलाज है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनाए गए आईसीटीसी केंद्रों में समय समय पर उचित जांच और सलाह ली जाए तो एड्स जैसी जानलेवा बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
कौशिक ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसाइटी की ओर से ड्रामा टीमाें के साथ राजौंद खंड के 15 गांवों में एच आई वी एड्स की पूर्ण जानकारी के लिए नाटकों के मंचन के माध्यम से लोगों को शीघ्र ही जागरूक किया जाएगा।
इस बीमारी से बचने के उपायों के बारे में भी पूरी जानकारी दी जाएगी। उन्हाेंने बताया कि इस केंद्र के तहत वर्ष 2007 में 561 लोगों की जांच की गई। इनमें से 3 पॉजिटिव पाए गए, 2008 में 1909 लोगों में से 9 पॉजिटिव पाए गए, 2009 में 2447 लोगाें में 15 पॉजिटिव पाए गए, 2010 में 3516 लोगों की जांच की गई। इनमें से 24 पॉजिटिव पाए गए। 2011 में 3104 लोगों की जांच की गई जिनमें से 12 पॉजिटिव पाए गए। 2012 में 3435 लोगों की जांच की गई। इनमें से 16 पॉजिटिव पाए गए। कौशिक ने बताया कि 2013 के सितंबर माह तक 2352 लोगों की जांच की गई है जिनमें से 20 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। कौशिक ने कहा कि असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित खून, संक्रमित सुई व संक्रमित माता से बच्चाें को होने का ज्यादा खतरा होता है। यह बीमारी आपस से हाथ मिलाने, साथ रहने व साथ खाना खाने से नही फैलती है।