छिछड़ाना गांव में बलिदानी किशोरी लाल के परिजनों को सम्मानित करते संगठन के पदाधिकारी। संवाद
-पूर्व सैनिक कल्याण संगठन और ग्रामीणों ने छिछड़ाना में मनाया 65वां बलिदान दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
इसराना। छिछड़ाना गांव के वीर सपूत गनर किशोरी लाल ने 1962 के भारत-चीन युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। सोमवार को गांव स्थित सरकारी स्कूल में पूर्व सैनिक कल्याण संगठन हरियाणा द्वारा बलिदानी गनर किशोरी लाल का 65वां बलिदान दिवस अत्यंत श्रद्धा व गर्व के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम में बलिदानी के पुत्र हरिओम ने अपने पिता के चित्र पर जोत प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पूर्व सैनिक कल्याण संगठन जिला पानीपत के अध्यक्ष राजवीर शर्मा ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए उनके अदम्य साहस को नमन किया।
अध्यक्ष राजवीर शर्मा ने कहा कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हम सबकी आन, बान और शान है। वह देश के हजारों बलिदानियों के रक्त से सींचा गया प्रतीक है। एक सैनिक की रगों में महाराणा प्रताप का शौर्य, छत्रपति शिवाजी महाराज का पराक्रम, भगत सिंह का बलिदान और चंद्रशेखर आजाद की ललकार दौड़ती है। पूरा देश चैन की नींद इसलिए सोता है क्योंकि सीमा पर हमारे सैनिक मुस्तैद हैं।
18 वर्ष की आयु में सेना में हुए थे भर्ती
गांव छिछड़ाना की माटी के लाल किशोरी लाल का जन्म 10 अगस्त 1940 को पिता रामस्वरूप व माता सोना देवी के घर हुआ था। गांव अहर से हाई स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद देश सेवा के जज्बे के साथ वे पांच जून 1958 को मात्र 18 वर्ष की उम्र में तोपखाना रेजिमेंट (आर्टिलरी) में भर्ती हुए थे। 1962 के युद्ध में वे सीमा पर अपनी तोप के साथ डटे रहे और दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देते हुए 20 अक्तूबर को अपना बलिदान दिया। सरपंच प्रतिनिधि अनिल शर्मा ने भी उनकी बहादुरी की सराहना की।
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