पानीपत। व्यापारी पहले जीएसटी को लागू होने के बाद इसके फेर में उलझ गया। अपनी बही और खातों में हिसाब किताब रखने वाले व्यापारी को अब ऑनलाइन हिसाब रखना पड़ता है। इसके लिए सीए या अकाउंटेंट की मदद लेना जरूरी हो गया है। इसके साथ व्यापारी को ऑनलाइन ट्रेडिंग का बढ़ता प्रचलन भी मार दे रहा है। साथ ही बाजारों में सुरक्षा व व्यवस्था के पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। इन सबके चलते व्यापारियों ने अपने आसपास तक ही उलझा कर रख दिया है। वे चाहकर भी इस जाल से निकल नहीं पा रहे हैं। वहीं लोगों के प्रॉपर्टी आईडी व अन्य कामों में लगे होने के चलते बाजार की तरफ नहीं जा रहे हैं। ऐसे में बाजार में भी मंदी नजर आती है।
परेशानियां बढ़ा रही जीएसटी
सुरेश सैनी ने बताया कि व्यापारियों को जीएसटी की वजह से काफी काम बढ़ गया है। वे पहले अपनी बही खातों में हिसाब रखते थे। जीएसटी लागू होने के बाद उनको सब कुछ ऑनलाइन रखना पड़ता है। एक छोटे व्यापारी को भी अकाउंटेंट या सीए की मदद लेनी पड़ती है। जिसके चलते खर्च भी बढ़ गया है। व्यापारी को एक नंबर में काम करने की छूट होनी चाहिए। वह पहले भी टैक्स देता था। लेकिन अब कागजों का बोझ बढ़ गया है।
बाजारों में सुरक्षा के हो पुख्ता इंतजाम
निशांत सोनी ने बताया कि बाजारों में सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। पुलिस व प्रशासन द्वारा बाजार में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की है। चोरी की घटनाएं होने के बाद भी व्यापक प्रबंध नहीं हैं। पुलिस घटना होने पर प्रतिष्ठान पर सीसीटीवी कैमरा जरूरी लगा होने के आदेश कर देते हैं, जबकि शहर में सरकारी स्तर पर सीसीटीवी कैमरे आज तक नहीं लग पाए हैं। बाजार की सड़कों की भी बुरी स्थिति है। इसका समाधान होना चाहिए।
बाजारों में अतिक्रमण सबसे बड़ा मुद्दा
रमेश बठला ने बताया कि बाजारों में अतिक्रमण आज का सबसे बड़ा मुद्दा है। जिसे दूर करने के लिए प्रशासन को कार्रवाई करनी आवश्यक है। अतिक्रमण की वजह से लोगों को घंटों तक जाम में फंसना पड़ता है। इससे आमजन को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन इसके समाधान को लेकर प्रयास करें तो व्यापार भी बढ़ जाएगा। व्यापारी पहले से ही ऑनलाइन ट्रेडिंग बढ़ने पर अपने व्यापार को लेकर चिंतित है। इसका भी समाधान होना चाहिए।
पानी की निकासी के इंतजाम नहीं
विशाल वर्मा ने बताया कि शहर और बाजारों में पानी की निकासी और व्यवस्था के कोई इंतजाम नहीं हैं। स्ट्रीट लाइट न होने से बाजार व शहर में अंधेरा रहता है। सेक्टरों में पानी निकासी नहीं है। थोड़ी सी बारिश में सड़कें व गलियां जलमग्न हो जाती हैं। जिनकी निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। कई सड़कों शहर के बीचोंबीच शराब के खुर्दे चल रहे हैं। पुलिस इनको बंद कराने में फेल साबित हो रही है। निगम साफ-सफाई तक नहीं करा पा रहा है।
खरीदारी छोड़ आईडी ठीक कराने में उलझे
व्यापारी राजीव सोनी ने बताया कि लोग प्राॅपर्टी आईडी और फैमिली आईडी को ठीक कराने में लगे रहे। निगम में प्रॉपर्टी आईडी के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार चला। निगम के लगातार चक्कर काटने के बाद भी दुरुस्त नहीं की गई। दलालों के माध्यम से एक दिन में दो-दो बार ठीक करा ली गई। लोगों का बाजार की तरफ ध्यान ही नहीं गया। ऐसे में बाजार में मंदी आती चली गई। युवा वर्ग बाजार में आने की बजाय ऑनलाइन ट्रेडिंग करने लग गया। अब छोटे व्यापारी दुकान या प्रतिष्ठान का किराया भी मुश्किल से निकाल पाता है।
व्यापारी अपने ही व्यापार का बन गया मुनीम
व्यापारी पहले भी टैक्स देता था और आज भी टैक्स दे रहा है। अब इसका थोड़ा प्रारुप बदल दिया। ऐसे में उस पर पूरे काम के साथ अपना लेखा-जोखा संभालने की जिम्मेदारी बढ़ गई। वह जीएसटी लागू होने के बाद अपने काम आगे बढ़ाने की बजाय इसके खातों को संभालने में लगे हैं। अधिकारियों को इसके नुकसान के बारे में सबकुछ जानकारी है। वे इन सबको अनदेखा कर रहे हैं। सरकार टैक्स लगाए, लेकिन उसके बदले सुविधा भी दी जाएं।