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...तो नन्ही परी को आज नसीब हो जाएगी मां की गोद

Wed, 28 Oct 2015 11:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत
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सब कुछ ठीकठाक रहा तो सिविल अस्पताल में साढ़े चार माह से पल रही नन्ही परी को  वीरवार को मां की गोद नसीब हो जाएगी। परी और बच्चा बदलने का आरोप लगाकर परी को ठुकराने वाली उसकी कथित मां कविता के डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट आ गई है। पुलिस अधिकारी हालांकि रिपोर्ट का खुलासा वीरवार को ही करने की बात कह रहे हैं लेकिन अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि रामनगर की कविता से ही परी का डीएनए मैच हुआ है। सही क्या है, इसका ठीक-ठीक पता लगने के लिए अब कुछ ही घंटे का इंतजार बाकी है। इस बीच कहा जा रहा है कि रामनगर की कविता और उसका पति एक बार फिर हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गए हैं।

बुधवार सुबह चला अनशन शाम तक चला
बच्ची परी की डीएनए रिपोर्ट का खुलासा करने की एक माह से चल रही मांग बुधवार को एक बार  फिर तेज हो गई और टीम आवाज व दूसरे संगठन लघु सचिवालय के सामने एलीवेटिड हाईवे के नीचे अनशन पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन और पुलिस पर बच्ची की डीएनए रिपोर्ट जान-बूझकर अटकाने का आरोप लगाया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से बात कर मामले  के बारे में अवगत कराया और फिर अनशनकारियों को देर रात या फिर वीरवार सुबह  तक रिपोर्ट आने का भरोसा दिलाया। भाजपा पार्षद लोकेश नांगरू, संजीव दहिया और किसान नेता बिंटू मलिक ने जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।
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इधर जिला पुलिस का एक अधिकारी डीएनए की रिपोर्ट लेने को चंडीगढ़ रवाना हो गया। यह अधिकारी रिपोर्ट लेकर देर शाम वापस आया। यहां पर एसपी राहुल शर्मा और अन्य पुलिस अधिकारियों ने रिपोर्ट देखी और संबंधित लोगों को इसका नोटिस जारी किया। पता चला है कि आरोपकर्ता परिवार रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की बजाय कोर्ट को सौंपने की मांग को लेकर एक बार फिर कोर्ट की शरण में चला गया है। उधर डीएसपी दलबीर सिंह के अनुसार पुलिस अधीक्षक लघु सचिवालय स्थित एसपी कार्यालय में वीरवार को खुद रिपोर्ट को सार्वजनिक करेंगे और यहीं पर बच्ची को उनके असल मां-बाप को सौंपा जाएगा।

यह है मामला
सिविल अस्पताल में 18 जून को रामनगर निवासी कविता ने डॉक्टरों व स्टाफ नर्स पर बच्चा बदलने का आरोप लगाया था।  कविता की 17 जून को सिविल अस्पताल में डिलीवरी हुई थी। कविता के अनुसार उसको उस वक्त बच्ची पैदा होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन उसको अगले दिन दूध पिलाने  को लड़का दिया गया। उसके हाथ पर उसका और उसके पति अमित के नाम का टैग बंधा  हुआ था।

थाना शहर पुलिस ने उसकी शिकायत पर डॉक्टर व स्टाफ नर्स के खिलाफ  मुकदमा दर्ज कर लिया था। परिजनों की मांग पर पुलिस ने डीएनए टेस्ट कराने का फैसला लिया। इसके लिए पुलिस ने कई बार तारीख ली लेकिन रामनगर निवासी कविता मधुबन की बजाय चंडीगढ़ डीएनए कराने की मांग पर अड़ गई। प्रशासन ने 10 सितंबर को रामनगर की कविता के साथ नैन और ऊंचा समाना निवासी कविता का भी डीएनए कराने का फैसला किया। उनके बच्चों को भी 18 जून को सिविल अस्पताल की नर्सरी में होना पाया गया था।

दो  बार हुआ टेस्ट
28 सितंबर को परी, रामनगर, ऊंचा समाना व नैन गांव की कविता का डीएनए होना था। लेकिन रामनगर की कविता नहीं आई तो प्रशासन व  पुलिस ने परी और दोनों कविता का डीएनए कराया। दूसरी तरफ रामनगर की कविता की याचिका पर हाईकोर्ट ने 29 सितंबर को सुनवाई करते हुए प्रशासन को एक अक्तूबर को डीएनए कराने के आदेश दिए। एक अक्तूबर को रामनगर निवासी कविता के साथ बच्ची परी का भी फिर से डीएनए टेस्ट कराया गया।
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वर्जन
बच्ची और महिला की डीएनए रिपोर्ट आ गई है। पुलिस इसको लेकर विशेषज्ञों की सलाह ले रही है।  पुलिस रिपोर्ट को वीरवार को सार्वजनिक करेगी और बच्ची को उसके परिजनों को सौंपा जाएगा।- दलबीर सिंह, डीएसपी शहर पानीपत।
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