पानीपत। भोले बाबा का समर्पित सावन माह के पहले सोमवार के लिए शिवालय सजकर तैयार हो गए हैं। मंदिर परिसर से लेकर शिवलिंग तक विशेष फूलों से सजाए गए हैं। रंग बिरंगी लाइटों से सजे शिवालय आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। मंदिरों में सुबह भोले बाबा का विशेष श्रृंगार कर मंगल आरती की जाएगी। इसके बाद शाम को शयन आरती की जाएगी। मंदिरों में दो समय की आरती की तैयारी पूरी कर ली हैं।
सावन माह में सोमवार को पूजा का विशेष महत्व है। भक्त सोमवार का व्रत रखने के साथ मंदिरों में भोले बाबा का विशेष पूजन करेंगे। इसके लिए मंदिरों में तैयारी पूरी कर ली है। असंध रोड स्थित शिव मंदिर के पुजारी सुरेंद्र शास्त्री ने बताया कि मंदिर में सोमवार तड़के भोले बाबा और पार्वती माता का स्नान व श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाएंगे। मंदिर में भंडारा लगाया जाएगा।
सनातन धर्म मंदिर मॉडल टाउन के प्रधान तरुण गांधी ने बताया कि मंदिर परिसर को विशेष फूलों, रंग बिरंगी लाइटों व कपड़े से सजा दिया है। शिवलिंग को दिल्ली के फूलों से सजाया है। मंदिर परिसर में मुख्य शिवलिंग के साथ 12 अन्य शिवलिंग स्थापित किए गए हैं। यहां तड़के की भक्तों का पहुंचना शुरू हो जाएगा। जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए विशेष व्यवस्था की है। शाम के समय शयन आरती की जाएगी। भजन मंडली द्वारा भजन और आरती गायन के साथ भोले बाबा का शयन कराया जाएगा।
असंध रोड की दत्ता कॉलोनी स्थित श्रीकृष्णा राधा मंदिर के प्रमुख सेवादार विनोद खर्ब और डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि सोमवार को मुख्य पुजारी भागवत की अगुवाई में पूजन शुरू किया जाएगा। जलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे तक जलाभिषेक किया जाएगा। मंदिर में शाम के समय आरती की जाएगी।
ऐसे करें सोमवार को पूजन
पंडित प्रवीण शास्त्री ने बताया कि सावन माह के प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्रियां अर्पित करना फलदायी माना जाता है। सोमवार को पूरे दिन शिव पूजन किया जा सकता है। विशेष फल की प्राप्ति के लिए शुभ मुहूर्तों में जलाभिषेक करना उत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त तड़के 04.11 से 04.52 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:59 से 12:55 बजे तक है। इसके साथ ही प्रदोष काल भी जलाभिषेक के लिए यह शुभ माना जाता है।
इन मंत्रों के साथ करें जलाभिषेक
ओमत नम: शिवाय
ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ओम नमो भगवते रुद्राय नमः
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः
ओम शर्वाय नम:।