माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। प्रशासन की सख्ती के बाद भी जिले में दो दिन में पराली जलाने के तीन मामले आ चुके हैं। प्रशासन ने तीन किसानाें पर केस दर्ज कराया है। इन किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री तक दर्ज होगी। ये किसान आगामी दो साल तक मंडी में फसल नहीं बेच पाएंगे। इन पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
घरौंडा कस्बे के मलिकपुर गांव में किसान जसमेर ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के पास स्थित अपने करीब सवा एकड़ खेत में पराली को शनिवार को दोपहर करीब एक बजे आग लगाई थी। फुरलक गांव में किसान दिनेश और घरौंडा के बिजना गांव के किसान विक्की ने रविवार दोपहर को अपने करीब एक से सवा एकड़ फसल के अवशेषों में आग लगा दी थी।
आगजनी की जानकारी प्रशासन को हरसेक सेटेलाइट के जरिए मिली। इस पर कृषि विभाग और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। निरीक्षण के बाद पुष्टि होने पर किसानों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। दो केस घरौंडा थाना पुलिस में दर्ज कराए गए हैं जबकि एक केस थाना सदर पुलिस ने दर्ज किया है। खरीफ के सीजन में इस बार जिले में लगभग 1.70 लाख हेक्टेयर भूमि में धान की रोपाई की गई है। धान की किस्म 1509 पककर तैयार हो चुकी है जिसकी कटाई शुरू हो चुकी है। आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए इस बार जिला स्तरीय एनफोर्समेंट टीम में अतिरिक्त उपायुक्त सहित जिले के 7 उच्च अधिकारी और 750 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
अब जुर्माना भी देना पड़ेगा दो से तीन गुना
कृषि विभाग से एएसओ डॉ. सुनील जांगड़ा ने बताया कि पिछले वर्ष 2024-25 में पराली जलाने के दोषी 82 किसानों पर एफआईआर दर्ज कर जुर्माना भी वसूला गया था। सरकार ने आगजनी करने वाले किसानों पर आर्थिक दंड लगाने का भी प्रावधान किया है। खास बात ये है कि अबकी बार जुर्माना बढ़ा दिया गया है। पहले दो एकड़ तक 2500 रुपये, पांच एकड़ तक 5000 रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा 15000 रुपये जुर्माना का प्रावधान था लेकिन अब ये जुर्माना पांच हजार, 15 हजार और तीस हजार रुपये कर दिया गया है।
दो साल में कम हुई आगजनी की घटनाएं
पिछले दो वर्षाें से आगजनी की घटनाओं में लगभग 60 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में पराली जलाने की घटनाएं 301 थीं। वर्ष 2023 में ये घटकर 126 रह गईं। वर्ष 2024 में 95 घटनाएं ही पराली जलाने की दर्ज की गईं। वर्ष 2023 में रेड जोन गांवों की संख्या 10 और यलो जोन गांवों की संख्या 53 थी। वर्ष 2024 में रेड जोन गांवों की संख्या एक और यलो जोन गांवों की संख्या 17 रह गई। वर्ष 2025 में इन घटनाओं को शून्य करने का प्रयास किया जा रहा है।
सेटेलाइट से रखी जा रही नजर
खरीफ सीजन में फसल अवशेषों को आगजनी से रोकने के लिए सेटेलाइट से खेतों पर नजर रखी जा रही है। अवशेषों में आग लगते ही सेटेलाइट से उसकी लोकेशन का पता चल जाएगा। इन्फोर्समेंट टीम मौके पर पहुंच टीम किसान पर जुर्माना लगाने के साथ एफआईआर दर्ज कराएगी। किसान के रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी दर्ज होगी जिससे वह आने वाले दो साल तक मंडी में पोर्टल के माध्यम से अपनी फसल तक नहीं बेच पाएगा। -राजेश कुमार, ऑल ओवर इंचार्ज इन्फोर्समेंट टीम,
एसडीएम, घरौंडा