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Panipat News: 220 केवी हाईटेंशन लाइनों के नीचे बन चुके हजारों मकान और फैक्ट्री, निगम ने भी लगा दिए बिजली कनेक्शन

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पानीपत। नंगल डैम से लेकर दिल्ली की ओर जिले से गुजरने वाली 220 केवी की डबल सर्किट लाइन के नीचे पिछले कई सालों में हजारों मकान और फैक्टरियां बन चुकी हैं। जबकि बिजली विभाग के नियम के अनुसार इस लाइन के नीचे किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध होता है। इस लाइन के दाएं बाएं भी करीब पांच मीटर के दायरे में निर्माण नहीं किया जा सकता। बावजूद लाइन के नीचे, आगे, पीछे सभी जगह निर्माण होते गए। हैरानी की बात ये है कि इन निर्माणों को बिजली निगम ने बिजली के कनेक्शन भी बांट दिए। जबकि बीबीएमबी की ओर से बिजली निगम को 20 से भी ज्यादा बार नोटिस देकर हाईटेंशन तार के नीचे वाले निर्माणों को कनेक्शन न देने बारे सचेत किया जा चुका है। वहीं, जिला योजनाकार विभाग को भी बीबीएमबी नोटिस देकर कार्रवाई करने और अवैध निर्माण रोकने बारे आगाह कर चुका है लेकिन बिजली निगम और डीटीपी की लापहरवाही के चलते इन लाइनों के नीचे अवैध निर्माण होते चले गए।
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जब इन विभागों ने हाईटेंशन लाइन के नीचे आने वाले निर्माणों, मकानों इत्यादि पर कोई कार्रवाई नहीं की तो इस पर स्वयं बीबीएमबी ने ऐसे मकानों को चिह्नित कर इनको नोटिस देने शुरू कर दिए। इन नोटिस में बीबीएमबी की ओर से स्पष्ट हिदायत दी गई थी कि आपका ये निर्माण लाइन के नीचे या संपर्क में है। इसे रोकें, ये अवैध निर्माण है। अगर इसकी वजह से कल कोई हादसा होता है तो उसके जिम्मेदार आप खुद होंगे। अब तक बीबीएमबी में जिले में करीब 800 निर्माणों को नोटिस दे चुका है। इनमें से सैकड़ों को दूसरी से तीसरी बार भी नोटिस दिया गया है। इसे गंभीर विषय मानते हुए बीबीएमबी के अधिकारियों ने सोमवार को बिजली निगम के अधिकारियों के साथ बैठक भी की और उनकी ओर से दिए गए नोटिस पर कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की। जिसका जवाब निगम अधिकारी नहीं दे पाए। महज आश्वासन के साथ बीबीएमबी टीम को लौटना पड़ा।

बॉक्स
मौके पर लोगों को किया जागरूक

घटनास्थल पर पहुंचे बीबीमएबी के जेई बलराज शर्मा ने कहा कि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड द्वारा हाईटेंशन के नीचे निर्माण करने वालों और रहने वालों को सख्त हिदायतें दी जाती हैं,जागरूकता अभियान तक चलाए जाते हैं लेकिन इनके नियमों को कोई नहीं मानता जो बाद में हादसों का कारण बनते हैं। उ्न्होंने लोगों से कहा कि लाइन के संपर्क में आने से जान माल का नुकसान हो सकता है इसलिए हमेशा इससे दूरी बनानी चाहिए। लाइन के कंडक्टर से मकान की दूरी कम से कम पांच मीटर होनी चाहिए। बच्चों को पतंग उड़ाने से रोकें, इससे बच्चे हाईटेंशन कंडक्टर के संपर्क में आ सकते हैं। करीब से जाने वाली हाईटेंशन के पास या छत पर कपड़े न सुखाएं। हाईटेंशन के नीचे आग न जलाएं, लाइन के नीचे कोई पेड भी लगाएं और न ही कोई निर्माण करें।
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ये हैं धूलकोट और पानीपत कुरूक्षेत्र लाइन-
शहर से पानीपत-कुरुक्षेत्र व धूलकोट वाली दो हाइटेंशन 220 केवी की लाइन गुजरती हैं। एक अंबाला से दिल्ली की ओर जीटी रोड के बाएं ओर की 1978 से बनी सिंगल सर्किट हाईटेेंशन लाइन है। जबकि दूसरी जीटी रोड राइट साइड में 1966 से डबल सर्किट हाईटेेंशन तार है। दोनों के नीचे ही इस समय कई अवैध कॉलोनियां बन चुकी हैं। इनके नीचे किसी भी प्रकार का निर्माण या पेड़ लगाना तक मान्य नहीं है। लेकिन बिजली निगम के अधिकारी इनके नीचे अपनी लाइनों को भी बिछा देते हैं। यहां तक की यहां बन चुकी कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन तक बांटे गए हैं। इनकी वजह से ही कई बार हादसे तक हो चुके हैं।

वर्जन-
चलाएंगे जागरूकता अभियान- बीबीएमबी टीम

बीबीएमबी के एसडीओ अजितेश राजा और जेई बलराज शर्मा ने कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए एक बार फिर से अभियान चलाया जाएगा। दूसरी ओर नोटिस देने का काम भी जारी रहेगा। बिजली निगम और डीटपी को कई बार नोटिस भेजकर हिदायत दी है कि वे लाइन के नीचे कनेक्शन न दें और इनके नीचे किसी भी प्रकार का निर्माण न करने दें लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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