पानीपत। रोडवेज विभाग में हैवी लाइसेंस जारी करने में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। खास बात यह है कि जिसे ड्राइविंग बिल्कुल नहीं आती थी, उसे भी लाइसेंस जारी किया जा रहा था, लेकिन उससे रकम औरों की अपेक्षा दोगुनी वसूली जा रही थी। ऐसे में बिना प्रशिक्षण के चालक बनने वाले न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के जानमाल के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते थे। यह स्थिति तब है जबकि पहले भी इस तरह के हादसे हो चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार रोडवेज में जो प्रशिक्षु डिपो में ट्रेनिंग के लिए नहीं आना चाहते थे, उनसे हाजिरी लगवाने के नाम पर 20 हजार और जो बस चलाना नहीं जानते थे, उनसे हैवी लाइसेंस बनाने के लिए 40 हजार रुपये लिए जाते थे। ऐसे अनट्रेंड बस चालकों की लापरवाही से पिछले तीन माह में दो बड़े हादसे भी हुए हैं। इसराना के पास एक हादसे में कैंटर से टक्कर में बस में सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और 15 लोग घायल हो गए थे। दूसरे हादसे में डंपर चालक की मौत हो गई थी। इसके अलावा समालखा के पास भी ऐसे ही अनट्रेंड बस चालक ने ट्रक में टक्कर मार दी थी। रोडवेज यूनियन ने ऐसे अनट्रेंड चालकों पर सवाल भी उठाए थे। इन चालकों को किलोमीटर स्कीम के तहत भर्ती किया गया था।
ट्रेनिंग के दौरान छुट्टी करने पर लगता था 10-12 हजार का जुर्माना -
ट्रेनिंग के दौरान छुट्टी करने पर 10 से 12 हजार रुपये का जुर्माना लगता है। ये राशि ट्रेनिंग स्कूल के इंचार्ज सुनील, प्रशिक्षक नरेश और प्रदीप की जेब में जाती थी। ये भी जांच में निकलकर सामने आया है। इस मामले में अन्य नौ कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सात का कैंसल किया सर्टिफिकेट
18 प्रशिक्षु में से 11 प्रशिक्षु जो दो से तीन ट्रेनिंग पर नहीं आए थे, उन्हें लगभग सप्ताह तक और ट्रेनिंग देकर उन्हें लाइसेंस जारी किया जाएगा। वहीं सात प्रशिक्षुओं का सर्टिफिकेट कैंसल कर दिया गया है। यह प्रशिक्षु 1209 नंबर बैच के थे।
जीएम के पास हस्ताक्षर के लिए फाइल पहुंची तो हुआ शक
सर्टिफिकेट जारी करने के बाद जब हस्ताक्षर करने के लिए जीएम के पास 1209 नंबर की फाइल पहुंची तो उन्हें शक हुआ और उन्होंने फाइल को फैक्स कराकर जांच करने के लिए कहा। इसमें 18 प्रशिक्षु दोषी पाए गए थे। बाकी 111 प्रशिक्षु के सर्टिफिकेट जारी कर उन्हें लाइसेंस दे दिया गया था।
निजी बस चालकों को बस चलाने की अनुमति न दें : मलिक
- रोडवेज यूनियन प्रधान सुल्तान मलिक का कहना है रोडवेज प्रबंधन निजी चालकों को बस चलाने की अनुमति न दे, क्योंकि वह बिना ट्रेनिंग किए ही बस चलाने लगते हैं, जिससे हादसे बढ़ते जा रहे हैं।