पानीपत। शहर की सफाई के लिए अब दो जोन के टेंडर का भी विरोध शुरू हो गया है। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि निगम ने जानबूझ कर ऐसी शर्तें रखीं है कि जिससे दूसरी कंपनी प्रक्रिया में हिस्सा ही न ले सके। उन्होंने वार्ड वार टेंडर लगाने की मांग की है।
इस मामले में पार्षदों ने वीरवार को शहरी विधायक प्रमोद विज से मुलाकात की। पार्षदों ने कहा कि किसी भी कीमत पर दो जोन में सफाई का टेंडर मंजूर नहीं है। यह भी आरोप है कि दो जोन में सफाई के टेंडर में वार्ड वार सफाई कर्मियों, वाहनों और खर्च की जानकारी भी नहीं दी गई है। निगम आयुक्त के आने के बाद इसके विरोध में प्रदर्शन करेंगे। दो जोन मे टेंडर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब तक पुराने टेंडरों को भी निगम ने रद्द नहीं किया है।
काम के बारे में पूछा तक नहीं, आर्टिकल -14 का है उल्लंघन
वार्ड-15 के पार्षद अशोक छाबड़ा ने कहा कि किसी भी काम का सत्यापन पार्षद से कराया जाता है, लेकिन इस काम के लिए कोई राय नहीं ली गई। इसका भुगतान मेयर और आयुक्त की ओर से होगा। ये समझ से बाहर है। वार्ड-23 के पार्षद अश्वनी धींगड़ा ने कहा कि दो जोन के टेंडर के नियम एवं शर्ते गलत हैं। व्यक्ति विशेष का फायदा पहुंचाना लगता है। यह आर्टिकल -14 का उल्लंघन है।
फैसला लेने के बाद तीन माह से रद्द नहीं किए टेंडर
वार्ड-11 की पार्षद कोमल सैनी और दिनेश सैनी ने कहा कि तीन महीने पहले फैसले के बावजूद पुराने टेंडर रद्द नहीं किए, अब दो जोन में टेंडर से नए एवं पुराने में फर्क ही नहीं रहेगा। शहर की सफाई चौपट हो जाएगी। वार्ड-9 की पार्षद चंचल सहगल एवं विजय सहगल ने कहा कि सफाई टेंडरों में गोलमाल हो रहा है। छह रोड की सफाई वाला टेंडर भी रद्द नहीं किया बल्कि दो बार बढ़ा दिया। वार्ड-22 की पार्षद चंचल डाबर और योगेश डाबर ने सवाल उठाया कि जब निगम को एक वर्ष का टेंडर लगाने की मंजूरी मिली थी तो पांच वर्ष का क्यों लगाया गया। हम इसके विरोध में हैं।
पार्षदों के साथ, रोकेंगे पैसे की बर्बादी
शहर की सफाई व्यवस्था पर करोड़ों रुपये बर्बाद हो रहे हैं। इस प्रकार से शहर को लुटने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए सभी पार्षदों के साथ बैठकर विचार विमर्श किया जाएगा। पार्षदों की रायशुमारी के बाद जो भी सर्वसम्मति से फैसला होगा उस पर अमल किया जाएगा। - दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर