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Panipat News: मंच से प्रदेश की संस्कृति को जीवित करने में लगे रंगकर्मी

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पानीपत। रंगमंच मनोरंजन का साधन मात्र नहीं है बल्कि यह लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का भी बेहतरीन जरिया है। हर साल विश्व रंगमंच दिवस 27 मार्च को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य रंगमंच कला के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने है। पिछले 59 वर्षों से हर साल 27 मार्च को एक थीम का पालन किया जाता है। विश्व रंगमंच दिवस 2025 का थीम रंगमंच और शांति की संस्कृति है। जिले से भी कई कलाकार रंगमंच पर अपना हुनर बिखेर रहे हैं और लोगों को रंगमंच के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
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सेक्टर 11-12 निवासी नरेंद्र गर्ग लगभग 35 साल से रंगमंच पर कार्य कर रहे हैं और हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। नरेंद्र गर्ग ने बताया कि उन्होंने 1972 में एसडी पीजी कॉलेज पानीपत से बीए की परीक्षा पास की थी। कॉलेज के समय से ही वे रंगमंच पर नाटक आदि में अभिनय करते रहे हैं। इस दौरान उन्हें बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी मिला है।
यूथ फेस्टिवल में रीढ़ की हड्डी और अधिकारों का रक्षक नाटक में अभिनय किया। उस समय उनका संपर्क एक प्रोड्यूसर से हुआ। उसके बाद उन्होंने रलदू चढ़ गया घोड़ी पर नाटक में हीराे के पिता का अभिनय किया और दहेज के खिलाफ नाटक मुकलावा में लड़के के पिता का अभिनय किया। दोनों को ही दर्शकों का खूब प्यार मिला। सनातन धर्म माॅडल टाउन की रामलीला में कैकेई, मंथरा और अंगद का भी अभिनय किया।
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नृत्य नाटिका और नारद लीला में नारद का अभिनय करते हैं। गीता महोत्सव पर इसका मंचन करते हैं। मुल्तानी और सजा फिल्म में उन्होंने गरीब आदमी का और एक में पंडित का अभिनय किया। जिसे दर्शकों से खूब प्रशंसा मिली। वे अब दादा लख्मीचंद सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के महासचिव के पद पर काम कर रहे हैं।
मोदी के मंच पर बच्चियों ने किया नृत्य
मूल रूप से अहर गांव निवासी वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने गांव की रामलीला में 1997 से 2007 तक अभिनय किया। वे राम के पात्र के रूप में अभिनय करते थे। दादा लख्मीचंद सोशल सांग को बढ़ावा देना शुरू किया।
इसमें स्कूल व कॉलेजों में सांग करते हैं और युवाओं को अपनी संस्कृति के बारे में जागरूक करते हैं। 15 युवाओं की टीम के साथ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नाटक में अभिनय किया है। इसमें मात मने मरवाइये न थारी शान देखना चाहू हूं... गीत काफी लोकप्रिय भी हुआ। उनके निर्देशन में ऋतु, शशि और शिखा ने प्रधानमंत्री मोदी के मंच पर नृत्य प्रस्तुत किया है।
रंगमंच के फायदे
वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि रंगमंच के माध्यम से सभी आयु वर्ग के कलाकार आत्मविश्वास का निर्माण करते हैं। दूसरों के साथ मिलकर काम करना सीखते हैं और कला के प्रति प्रशंसा विकसित करते हैं। दर्शकों को एक नई भाषा, संस्कृति और कहानी कहने के तरीकों से अवगत कराया जाता है। दर्शक क्षेत्र के स्कूलों, समुदायों और अन्य व्यवसायों के लिए राजस्व लाते हैं। रंगमंच कला के प्रति प्रशंसा पैदा करते हैं।
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