कोरोना संक्रमण के कारण सीबीएसई 12वीं बोर्ड की परीक्षा रद्द होने से भले ही विद्यार्थियों का तनाव खत्म हो गया हो, लेकिन अब उन्हें अंकों की चिंता सताने लगी है। परीक्षा की तैयारी करने वाले मेधावी बच्चे अब इस बात को लेकर तनाव में हैं कि कहीं उन्हें सामान्य अंक देकर पास न कर दिया जाए। मेधावी विद्यार्थियों का कहना है कि किसी को नीट देना है तो किसी को इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ जैसे कोर्स की प्रवेश परीक्षा या विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए जाना है। अब इन विद्यार्थियों के पिछले प्रदर्शन के आधार पर ही परिणाम घोषित किए जाएंगे। वहीं बोर्ड विद्यार्थियों के लिए मूल्यांकन नीति बनाने में जुट गया है, जिसमें 15 दिन लग सकते हैं। वहीं, शिक्षा विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों की चिंता का निवारण करते हुए कहा कि 12वीं के अंकों को लेकर विद्यार्थियों को कोई परेशानी नहीं होगी।
नीति थ्योरी और प्रैक्टिल दोनों के लिए होगी
बोर्ड का प्रयास है कि जो भी पॉलिसी तैयार हो, वह बच्चों के लिए कारगर साबित हो। यह पॉलिसी थ्योरी व प्रैक्टिकल दोनों के लिए होगी। पॉलिसी तैयार होने के बाद इसे स्कूलों को भेजा जाएगा। पॉलिसी के आधार पर ही स्कूल मूल्यांकन कार्य के आगे का काम करेंगे। इसके लिए स्कूलों को भी पर्याप्त समय दिया जाएगा। रिजल्ट जुलाई के अंत तक ही आने की संभावना है।
क्या कहते हैं छात्र
परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता का दौर खत्म हुआ है। महामारी के समय में जब चारों ओर से केवल परेशान करने वाली खबरें आ रही हैं। विद्यालय की तरफ से लगातार प्रयास किया जा रहा था कि हम सभी विद्यार्थी किसी भी समय परीक्षा देने के लिए तैयार रहें। हम सब इसमें लगे भी थे, लेकिन सरकार का निर्णय विद्यार्थियों के स्वास्थ्य एवं भविष्य दोनों को भली प्रकार से सुरक्षित करता है।
-अरमान, छात्र।
कोरोना संक्रमण के कारण पढ़ाई का बहुत नुकसान हुआ है। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा रद्द होने पर मायूस हूं। हालांकि स्कूल नहीं जा पाए, जिस कारण कई कठिनाइयां हुईं। दो बार प्री-बोर्ड परीक्षा दी हैं और प्रैक्टिकल भी दिए हैं। उसी के आधार पर ही विद्यार्थियों का वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए, ताकि आगे अच्छे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला ले पाए।
-पलक, छात्रा।
विद्यार्थियों को प्रमोट करने का निर्णय अच्छा है, क्योंकि विद्यार्थी भी काफी समय से असमंजस में थे। मौजूदा हालातों को देखते हुए अभिभावकों में भी भय का माहौल है। बाहर जाने से अभिभावक भी कतरा रहे हैं। अब आगे सरकार को कॉलेजों और अन्य कोर्सों में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा का प्रावधान करना चाहिए, ताकि सभी अपनी काबिलियत के आधार पर ही प्रवेश ले सकें।
-दिव्या कुमारी, छात्रा।
शिक्षक बोले-
सीबीएसई ने परिस्थिति अनुकूल निर्णय लिया है। छात्रों का एक बड़ा समूह महामारी जनित कारणों से इंटरनेट मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर परीक्षा रद्द कराने की मुहिम में जुटा था। हालांकि अभिभावकों या छात्रों द्वारा परीक्षा को टालने या रद्द करने की मांग के पीछे स्वास्थ्य जैसी चिंता वाजिब रही। कोई अभिभावक नहीं चाहेगा कि उनका बच्चा किसी गंभीर बीमारी का शिकार हो।
-ममता, शिक्षिका।
विद्यार्थियों और अभिभावकों का एक समूह परीक्षा आयोजित कराने की वकालत भी कर रहा था। इसमें वे मेधावी और प्रतिभाशाली छात्र हैं, जिन्होंने कठिन समय में भी परीक्षा की तैयारी की है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से इन मेधावी छात्रों का सीधे तौर पर नुकसान होता दिख रहा है। वैकल्पिक इंतजाम में जनरल मार्किंग होगी, जिसमें मेधावी छात्रों के लिए भावी जिंदगी में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
-गीता, शिक्षिका।
विशेषज्ञों की राय
परीक्षा रद्द करना कोई विकल्प नहीं हो सकता। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य चिंताओं के मद्देनजर टीकाकरण जैसा कदम सुरक्षित और प्रभावी हो सकता था। अगर अगले साल भी स्थिति अनुकूल नहीं रही तो परीक्षा रद्द करने का सिलसिला कब तक चलता रहेगा? परीक्षा रद्द करना सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है। भविष्य में हमारे नीति-नियंताओं को एक मजबूत खाका तैयार करने की जरूरत है।
-सुनीता शर्मा, प्राचार्य, न्यू ईरा पब्लिक स्कूल, मडलौडा, पानीपत।
इंजीनियरिंग एवं मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं में कहीं पर 12वीं के अंकों की आवश्यकता नहीं होती। पहले जेईई में 12वीं के अंक की जानकारी मांगी जाती थी। अब दो साल से यह बंधन भी हटा दिया गया है। विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले विद्यार्थियों को भी पीजी में प्रवेश के लिए परीक्षा पास करनी होगी। यूजी में प्रवेश के लिए स्नातक स्तर की परीक्षाएं पास करनी होंगी।
-तकदीर सिंह, काउंसलर, मनोविज्ञान।