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प्रभु नाम भवसागर से पार उतार देता है : समर्पण सागर महाराज

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पानीपत। जिनवाणी विद्या भारती स्कूल में श्री 1008 समव शरण महामंडल विधान का शुक्रवार को नौवां दिन रहा। यह आयोजन जैन संत समर्पण सागर महाराज के सानिध्य में किया गया। इस दौरान समर्पण सागर महाराज ने प्रभु नाम का महात्म्य बताया। उन्होंने कहा कि प्रभु नाम भवसागर से पार उतार देता है।
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श्री 1008 कल्पद्रुम समवशरण महामंडल विधान में शुक्रवार को सर्वप्रथम जिनाभिषेक एवं शांति धारा की गई। तत्पश्चात विधान की अंतिम पूजन का प्रारंभ हुआ। जिन सहस्त्रान आराधना की गई। जिसके अंतर्गत सौधर्म इंद्र भगवान के 1008 नाम से प्रभु की स्तुति करता है। जिनेंद्र भगवान को 1008 श्रीफल के साथ अर्घ समर्पित किए गए। समर्पण सागर महाराज ने कहा कि प्रभु नाम भवसागर से पार उतार देता है। जैसे राम नाम लिखा पत्थर समुद्र में तैर जाता है। ऐसे ही प्रभु का नाम जपने वाला एक दिन भवसागर से पार हो जाता है। जैन एवं वैदिक संस्कृति में स्त्रोतों की बहुत बड़ी महिमा है। जैन धर्म में कई विख्यात स्रोत हैं। कई प्रकार के अतिशय प्रकट हुए हैं। जिसमें भक्तामर स्रोत, कल्याण मंदिर स्रोत, विषापाहार स्रोत, जिन सहस्त्रनाम स्रोत जैन जगत में प्रसिद्ध है। इन स्रोतों की पाठ से व्यक्ति बडे़ से बडे़ संकट को अपने जीवन से टाल सकता है। संध्याकालीन आरती में चारों दिशाओं में 48-48 भक्तामर के दीप प्रज्ज्वलित किए गए। शनिवार को विधान का समापन जिनवाणी हवन के माध्यम से किया जाएगा। अतिथियों का स्वागत दिगंबर जैन पंचायत की कार्यकारिणी के द्वारा किया गया। संध्या के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम और श्री जी की महा आरती की गई।
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