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Panipat News: चांद रोता रहा रातभर, भोर की दिल्लगी हो गई...

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- आर्य पीजी कॉलेज में आयोजित काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने रचनाएं पेश कर लूटी वाहवाही
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अंकन साहित्यिक मंच की ओर से आर्य पीजी कॉलेज में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। पहले सत्र में कॉलेज की पूर्व उप-प्राचार्या डॉ. रानी रजनी मेहंदीरत्ता के काव्य संग्रह भावनाओं की धुन का लोकार्पण किया। सुभाष भाटिया ने कहा- मैं उठाईगीर नहीं, तन मन की लगी कहता लिखता हूं, न मैं शायर, न कवि, एक अदना सा प्राणी दिखता हूं। धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने कहा- चांद रोता रहा रातभर, भोर की दिल्लगी हो गई।
डॉ. रानी रजनी ने कहा- दूरदर्शन के रूपहले पर्दे पर बलात्कार के श्यामल समाचार, समाचार पत्रों के उजाले पन्नों पर बलात्कार के स्याह समाचार देख और पढ़कर आंखों से आंसू नहीं लावा पिघलता है, हृदय में एक हूक उठती है, दिल पल-पल जलता है।
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सोनिया सोनम अक्स ने कहा- आए हैं दुनिया में एक रोज चले जाएंगे, सारा सांसों का तमाशा है, हमारा क्या है। मनोज मधुरभाषी करण नगरी ने कहा- रुठे हुए अपनों को मनाना जानते हैं, उलझे हुए रिश्तों को निभाना जानते हैं। यह हिंदुस्तान की मिट्टी है प्रेम सिखाएगी, प्रेम पुजारी हैं हम, फैलाना जानते हैं। नफास खैराबादी ने कहा- जो हमको आइना दिखला रहे हैं, पसीने खुद उन्हीं को आ रहे हैं। कोई भूखा है तो उनकी बला से, वो सोने के निवाले खा रहे हैं। डॉ. एपी जैन ने कहा कि हम राम को रोम रोम में बसाते हैं, आराम में भी राम को बुलाते हैं।
नरेश लाभ ने कहा- झड़ते पत्ते देख-देख कर कब उपवन रोया करता, दिल की बातें दिल में रख कर, खुशियां बस है बोया करता। मानव मन में पीड़ा क्यों है, समझ नहीं बातें आती, छोड़ सकल अतीत की बातें, पथ को यह निर्मल करता। मीना दहूजा ने कहा- होता तो सब कुछ दुनिया में देखने वाली आंख न होती तो क्या होता। जवाहरलाल शर्मा ने कहा- शिक्षा का प्रसार हो, गुणवत्ता का आधार हो, मानव का विकास हो, समाज का उद्धार हो, अविद्या रूपी तम का, शिक्षा से उपकार हो।
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कविता मनुष्य की आत्मा : डॉ. हरीश
इस मौके पर प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता, दिल्ली के डीएवी कॉलेज के हिंदी के प्रोफेसर डॉ. हरीश अरोड़ा, बेला भाटिया, सुभाष भाटिया, जवाहरलाल शर्मा, सोनिया, डॉ. एपी जैन मौजूद रहीं। डॉ. हरीश अरोड़ा ने कहा कि कविता मनुष्य की आत्मा का सबसे सहज और निर्मल उद्गार है। जब भावनाएं शब्दों का रूप ले लेती हैं और उनमें जीवन की लय घूमने लगती है तब कविता जन्म लेती है। डॉ. एपी जैन ने बताया कि डॉ. रानी रजनी नाटक व माइम विधाओं में भी पारंगत हैं।
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