थर्मल के गांव आसन कलां में लंबे समय से प्रशासन के लिए सिरदर्द बनी विवादित पंचायती जमीन की बोली भारी विरोध और कड़ी सुरक्षा के बीच हुई।
पहले दिन देर शाम तक 76 प्लॉटों की बोली हो पाई। ग्रामीणों ने कई बार विरोध किया और कानूनी दावपेंच भी दिखाने की कोशिश की। लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों और प्रशासन के सख्त रवैये के आगे ग्रामीणों की एक नहीं चली। गांव में देर शाम तक बोली चल रही थी।
गांव आसन कलां में वीरवार को सुबह ही प्रशासनिक अधिकारियों का 850 एकड़ पंचायती जमीन की बोली के लिए पहुंचना शुरू हो गया। कुछ ही देर में एडीसी आरएस वर्मा, एसडीएम अश्वनी मलिक, सीटीएम हवा सिंह, एसडीएम समालखा विवेक कुमार की अगुवाई में पहुंचे।
उनके साथ डीडीपीओ सुरेंद्र सिंह, तहसीलदार सुरेश कुमार, बीडीपीओ अशोक छिक्कारा और थाना मतलौडा प्रभारी नरसिंह भारी पुलिस के साथ पहुंचे। कुछ लोग बोली को गैर कानूनी बताया और वकीलों को लेकर बोली स्थल पर पहुंचे। इसके लिए कब्जाधारियों ने अपने-अपने वकीलों को बुलाया था।
वकीलों ने उनका पक्ष रखा और जमीन के स्टे आर्डर दिखाए। एडीसी ने ऐसी जमीन की बोली नहीं करने का आश्वासन दिया। ग्रामीण प्रशासन की ओर से रिजर्व कोटे के प्लॉटाें के नंबर बताए जाने पर विरोध में खड़े हो गए और हंगामा कर दिया।
उनका कहना था कि इस प्रकार प्लॉट देने के बजाय लाटरी से ड्रा निकाला जाए। चूंकि यह जमीन नहर के साथ है। प्रशासन ने ग्रामीणों की मांग को नकार दिया। इसके लिए हंगामा बढ़ गया और पुलिस बल लाठीचार्ज तक को तैयार हो गई।
शुरुआत में कोई नहीं पहुंचा चौपाल
प्रशासन ने आसन कलां की प्रजापत चौपाल में पंचायती जमीन की बोली कराई। प्रशासनिक अधिकारी कई घंटे तक बोलीदाताओं का इंतजार करते रहे। लेकिन कोई भी बोली देने नहीं पहुंचा। प्रशासनिक अधिकारी बोली देने को लेकर आवाज लगाते रहे। लेकिन 11 बजे तक कोई ऊपर नहीं पहुंचा। दोनों पक्षों के लोग चौपाल के आसपास खड़े रहे।
बीरबल ने जमा कराई सबसे पहले सिक्योरटी
ग्रामीण बीरबल पंचायती जमीन की बोली को लेकर सबसे पहले आगे आए। उन्होंने सिक्योरिटी फीस के रूप में पांच हजार रुपये जमा कराए। इसके बाद ग्रामीण बोली देने के लिए आगे निकल आए और इनकी संख्या 230 तक पहुंच गई।
ये रहे नियम
पंचायती जमीन में 112 प्लॉट बनाए गए थे। जिसमें 30 प्रतिशत एससी वर्ग, दस प्रतिशत बीसी, दस प्रतिशत शहीदाें के परिजनों के लिए आरक्षित की गई। शहीद परिवार के आगे न आने पर इस कोटे को सामान्य वर्ग में शामिल कर दिया।
बाहरी व्यक्ति के आने पर हुआ हंगामा
गांव खंडरा निवासी अनिल पंचायती जमीन की बोली देने को आगे आ गया। जिसका ग्रामीणों ने विरोध जताया और इस बात को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। विरोध बढ़ने पर अनिल ने अपने पैसे वापस लिए और फिर हंगामा शांत हो पाया। गांव में बोली के दौरान कई बार हंगामे के आसार बन गए। इसको देखकर पुलिस ने ग्रामीणों को जिप्सी में डालकर ले जाने की चेतावनी दी। थाना प्रभारी की माइक में अनाउंसमेंट सुनकर लोग शांत हो गए।
पहली बोली 1.51 लाख में छूटी
एससी कोटे के पहले प्लाट की बोली नौ एकड़ की रही और सतपाल ने यह बोली दी। उसने उक्त जमीन डेढ़ साल के लिए डेढ़ लाख में ली। उसने उक्त जमीन पर खड़े पेड़ और अन्य सामान के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न करने की मांग की। कई लोगों ने बोली में दो बार हिस्सा लिया और कई एकड़ जमीन बोली पर ली।
प्रशासन ने किया कब्जा देने का वादा
प्रशासनिक अधिकारियों ने बोलीदाताओं को कब्जा दिलाने का वादा किया। हर बोलीदाता इसी सवाल को उठा रहा था। इस पर एसडीएम अश्वनी मलिक ने कहा कि वे लोग जमीन की बोली लगाए। जमीन का कब्जा दिलवाना प्रशासन का काम है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बोली की रकम बड़ी होने पर बैंक अधिकारियों को वहीं पर बुलाया और खजाना जमा कराने की बात कही।
गोचरांद जमीन खाली कराएं
प्रशासनिक अधिकारियों के सामने गांव की गोचरांद की जमीन खाली कराने की भी मांग उठी। ग्रामीणों का कहना था कि चौबीस एकड़ गोचरांद की जमीन पर कब्जा किया है। उसको कब्जा मुक्त कराया जाए। प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को जमीन कब्जा मुक्त कराने का आश्वासन दिया।
वर्जन
आसन कलां की पंचायती जमीन की बोंली हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही है। ग्रामीणों को इसमें विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए। वे खेती करना चाहते हैं तो इसकी बोली दे सकते हैं।
आरएस वर्मा, एडीसी, पानीपत