पानीपत। जिले में हाईवे पर हादसों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके बावजूद भी यातायात पुलिस के पास हादसों से बचाव के इंतजाम की खासी कमी है। जिले में तीन राष्ट्रीय राजमार्गों हैं। जिनकी कुल लंबाई करीब 85 किमी हैं। इनमें से राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर ही दो एंबुलेंस 24 घंटे तैनात रहती हैं। बाकी रोहतक हाईवे और पानीपत खटीमा हाईवे पर एबुलेंस नहीं रहती। स्टेट हाईवे पर एंबुलेंस और पेट्रोलिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। हादसा होने पर 20 से 30 मिनट के बाद ही एबुलेंस मौके पर पहुंच पाती हैं।
दिल्ली एनसीआर में शामिल और यूपी की सीमा पर होने के कारण पानीपत जिले से बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। जिले में तीन नेशनल हाईवे हैं। जिनमें नेशनल हाईवे-44 जीटी रोड गांजबड़ गांव की सीमा से शुरू होता और हथवाला बॉर्डर तक करीब 34 किमी लंबा है। वहीं रोहतक हाईवे सिवाह से शुरू होकर कैथ गांव तक करीब 35 किमी लंगा है। वहीं पानीपत- खटीमा हाईवे की लंबाई सिवाह गांव से सनौली बॉर्डर तक करीब 16 किमी हैं, इनमें सबसे मुख्य हाईवे जीटी रोड नेशनल हाईवे-44 है और 80 फीसदी वाहन इसी हाईवे से होकर गुजरते हैं। जिस कारण हाईवे पर दो एंबुलेंस 24 घंटे तैनात रहती हैं। एक एबुलेंस बाबरपुर यातायात थाने और दूसरी समालखा जोन में तैनात रहती है। वहीं रोहतक हाईवे और पानीपत खटीमा हाईवे पर यातायात पुलिस की कोई एंबुलेंस तैनात नहीं रहती। इसके साथ पानीपत में एक स्टेट हाईवे पानीपत-जींद है। यह हाईवे शहर के लालबत्ती चौक से नारा गांव तक है, जिसकी कुल लंबाई करीब 37 किमी है। स्टेट हाईवे पर न तो पेट्रोलिंग होती और न ही एंबुलेंस की कोई व्यवस्था है। हादसा होने पर फोन कर एंबुलेंस बुलानी पड़ती है।
पुलिस का दावा 15-20 मिनट में पहुंच जाती है एंबुलेंस
यातायात पुलिस का दावा है कि पानीपत में हाईवे पर हादसा होने की सूचना पर ईआरवी सेवा 10 मिनट के अंदर पहुंच जाती है। वहीं एबुलेंस सेवा भी 20 मिनट में पहुंच जाती है लेकिन, ज्यादातर हादसों के बाद एंबुलेंस पर देरी से पहुंचने का आरोप लगता है।
प्रतिदिन औसतन एक व्यक्ति की होती है मौत
जिले में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 11 माह में जिले में 485 से अधिक सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें करीब 317 लोगों की मौत हो चुकी है। औसतन एक व्यक्ति की प्रतिदिन सड़क हादसे में मौत होती हैं। वहीं घायलों की संख्या भी 350 से अधिक है।
तीन साल में हुए हादसे
वर्ष 2023 में सड़क हादसे में हुई मौत- 282
वर्ष 2024 में सड़क हादसों में हुई मौत- 308
वर्ष 2025 में नवंबर तक सड़क हादसों में हुई मौत- 317
जिले में हाईवे पर पेट्रोलिंग और एंबुलेंस सेवाएं हर समय मौजूद रहती हैं। कई बार जाम की स्थिति होने पर देरी हो सकती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में 15 से 20 मिनट के अंदर ही एंबुलेंस सेवा मौके पर पहुंच जाती है। पुलिस के अलावा टोल प्लाजा पर भी एजेंसियों के पास अपनी एंबुलेंस होती हैं।
- सुरेश कुमार सैनी, डीएसपी यातायात।