पानीपत। बीमारी को शराब सेवन से जुड़ा बताते हुए बीमा कंपनी को क्लेम देने से इन्कार करना भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे कंपनी की सेवा में कमी मानते हुए इलाज पर खर्च हुई एक लाख रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने कहा कि बिना किसी ठोस साक्ष्य के क्लेम खारिज करना अनुचित है।
पानीपत के एक गांव निवासी कुलदीप ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि उन्होंने स्टार हेल्थ कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। सितंबर 2023 में पेट में तेज दर्द होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इलाज पर करीब 1.20 लाख रुपये खर्च हुए, जिसमें एक लाख रुपये का क्लेम कंपनी से मांगा गया।
बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि बीमारी शराब सेवन से संबंधित है, जो पॉलिसी की शर्तों के अनुसार कवर नहीं होती। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की।
आयोग ने जांच में पाया गया कि बीमाधारक आदतन शराबी नहीं था, बल्कि कभी-कभार शराब का सेवन करता था। साथ ही पुरानी बीमारी और वर्तमान इलाज के बीच कोई सीधा संबंध भी साबित नहीं हुआ। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाई।
आयोग के चेयरमैन डॉ. आर.के. डोगरा ने बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करने को अनुचित करार देते हुए आदेश दिया कि कंपनी बीमाधारक को एक लाख रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए 11 हजार रुपये मुआवजा और 5500 रुपये मुकदमेबाजी खर्च भी देना होगा।
आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो कंपनी को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना पड़ेगा।