अहर (इसराना)। ऐतिहासिक गांव अहर में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। गांव में पेयजल की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। ऐतिहासिक तालाब पर भी अतिक्रमण कर लिया गया है। 20-22 एकड़ का तालाब अब दो-तीन एकड़ तक की सीमित रह गया है। ऐसे में ग्रामीणों को पेयजल के साथ पानी निकासी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की मांग पर अब ट्यूबवेल लगाकर आपूर्ति दी जा रही है। गांव की टेल तक 20 साल से लोहारी माइनर का पानी नहीं आ पाया है। ऐसे में जन स्वास्थ्य विभाग की टंकी आज तक सूखी पड़ी है। गांव की टेल दूसरे छोर तक पहुंचाने की मांग भी फाइलों में अटकी हुई है। ग्रामीण खारा पानी पीने और इसी से खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। गांव में पानी निकासी की भी समस्या गंभीर बनी हुई है।
गांव के चार तालाब में दो ही रह गए
गोरधन ने बताया कि गांव में चार तालाब थे। ग्रामीणों ने अतिक्रमण करना शुरू कर दिया। अब दो तालाब रह गए हैं। इनमें भी पशुओं के लिए कोई तालाब नहीं है। बोडंग वाला तालाब 20-22 एकड़ में था। अब यह दो से तीन एकड़ का रह गया है। कुछ लोगों ने तालाब पर अतिक्रमण कर लिया है। ग्राम पंचायत का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में लोगों की समस्या गंभीर होती जा रही है। इसका समाधान किया जाना चाहिए।
गांव का पानी पीने लायक नहीं
चांद राम ने बताया कि गांव का पानी पीने लायक नहीं है। कई जगह टीडीएस 2500 तक है। जन स्वास्थ्य विभाग की बड़ी टंकी तक पानी नहीं है। यह सूखी पड़ी है। ग्रामीणों की मांग पर एक ट्यूबवेल टंकी में लगवाया गया है। तीन ट्यूबवेल दूसरी जगह लगाए गए हैं। इनमें से एक ट्यूबवेल चालू नहीं हो पाया है। ग्रामीणों को दूर से सबमर्सिबल से पानी लाना पड़ता है। यह समस्या गंभीर बनती जा रही है।
लोहारी माइनर का पानी नहीं आता
सतीश खैंची ने बताया कि लोहारी माइनर का पानी गांव तक नहीं आ पाता। ऐसे में खेतों भी सूखे रहते हैं। ग्रामीण दूसरे हिस्से तक माइनर को बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। इसमें किसी प्रकार की सुनवाई नहीं हो पाई है। किसानों को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। किसान अपने स्तर पर दूर से पानी की लाइन लाने को मजबूर हो रहे हैं। सरकार या प्रशासन का खेतों के लिए पानी का प्रबंध करने की तरफ कोई ध्यान नहीं है।
पानी का टीडीएस बहुत ज्यादा
मेवा सिंह ने बताया कि गांव और खेतों से निकलने वाले पानी का टीडीसी बहुत अधिक है। यह 1500 से 2500 तक है। किसान इस पानी से खेतों की सिंचाई तक नहीं कर पाते। किसानों को फसल खराब होने का डर बना रहता है। गांव की बात करें तो पांच प्रतिशत हिस्से में पानी पीने लायक है।
महिलाओं को भी परेशानी
जिले सिंह ने बताया कि गांव में ट्यूबवेल का पानी 1400 फीट पर कुछ पीने लायक मिलता है। यह भी कुछ हिस्से में है। बाकी हिस्से में पानी खारा आता है। सरकारी ट्यूबवेल से सुबह व शाम को एक-एक घंटे पानी की आपूर्ति की जाती है। इस समय में पानी की मांग पूरी नहीं हो पाती। महिलाओं को बाबा कुंडीनाथ मंदिर में लगे सबमर्सिबल से पीने का पानी मटकों में लाना पड़ता है।
गोरधन।
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