पानीपत। सिविल अस्पताल परिसर में 21 करोड़ की लागत से बन रही एमसीएच (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ) विंग की सौगात एक साल देरी से मिलेगी। पीडब्ल्यूडी को अब बिल्डिंग दिसंबर 2024 तक स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर करनी है। इससे पहले बिल्डिंग का काम दिसंबर 2023 तक पूरा होना था, लेकिन बिल्डिंग के टेंडर में देरी और भुगतान में देर होने से होने पर काम में देरी हुई है। 2021 में कुरुक्षेत्र की निजी कंपनी ने एमसीएच विंग की बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू किया था। अब तक विंग का ढांचा पूरा तैयार हो चुका है। अब इसमें फर्नीचर व फिनिशिंग का काम शुरू होना है। एमसीएच विंग शुरू होने पर सिविल अस्पताल 300 बेड का होगा। फिलहाल 200 बेड का सिविल अस्पताल है और 100 बेड की एमसीएच विंग बनाई जा रही है। विंग पंचकूला की तर्ज पर बनाई जा रही है। बिल्डिंग 23 हजार 425 वर्ग फीट में बनाई जा रही है।
2018 में सीएम मनोहर लाल ने पानीपत में एमसीएच विंग के निर्माण को हरी झंडी दी थी। जून 2021 में विंग का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। विंग में प्रसव से पहले गर्भवती महिलाओं को रखने के लिए बेड होंगे। प्रसव संपन्न कराने के लिए 20 टेबल होंगी। प्रसव उपरांत 48 से 72 घंटे अस्पताल में भर्ती पहले के लिए जच्चा-बच्चा के लिए पर्याप्त बेड होंगे। महिला ओपीडी, शिशु रोग ओपीडी, स्पेशल न्यू बोर्न चाइल्ड केयर यूनिट (एसएनसीयू) बनेगी। एक ऑपरेशन थियेटर भी बन सकता है। जच्चा-बच्चा का चेकअप और इलाज एक छत के नीचे होगा।
सिविल अस्पताल में अगर कोई गर्भवती महिला या शिशु इलाज के लिए आता है तो पहले उसने पर्ची कटवानी पड़ती है। फिर भूतल पर डॉक्टर जांच करते हैं। अगर गर्भवती है तो उसे जांच के बाद दूसरे तल पर ले जाया जाता है। यहां पर डिलीवरी होने के बाद अगर शिशु को कोई दिक्कत है तो उसे पांचवें तल पर एसएनसीयू वार्ड में ले जाया जाता है। अगर महिला की सिजेरियन डिलीवरी होनी है तो उसे पांचवें तल पर ऑपरेशन थियेटर ले जाना पड़ता है। ऐसे में मरीजों के साथ साथ डॉक्टरों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
एमसीएच विंग का अभी काफी काम बचा है। पीडब्ल्यूडी को दिसंबर 2024 तक बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूरा कर हैंडओवर करनी है। बिल्डिंग के कार्य पर नजर रखी जा रही है। एमसीएच विंग बनने पर अस्पताल 300 बेड का होगा। जच्चा बच्चा को एक ही बेड के नीचे सभी सुविधाएं मिलेंगी।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।